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बच्चों में रीडिंग हैबिट विकसित करने का प्रयास, प्रथम राजस्थान विकसित कर रहा है होम लाइब्रेरी

देश के 50 फीसदी और राजस्थान के 55 फीसदी से अधिक 14 साल की आयु तक के बच्चे जो 5वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं उन्हें दूसरी कक्षा की पाठ्यपुस्तक तक पढऩा नहीं आता। यह खुलासा हुआ है 'असर' की रिपोर्ट से। जिसे देखते हुए अब प्रथम राजस्थान ने बच्चों में बुक रीडिंग की आदत विकसित करने के लिए बाल पुस्तकालयों की शुरुआत की है।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jan 17, 2023

Rakhi Hajela
जयपुर।
देश के 50 फीसदी और राजस्थान के 55 फीसदी से अधिक 14 साल की आयु तक के बच्चे जो 5वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं उन्हें दूसरी कक्षा की पाठ्यपुस्तक तक पढऩा नहीं आता। यह खुलासा हुआ है ‘असर’ की रिपोर्ट से। जिसे देखते हुए अब प्रथम राजस्थान ने बच्चों में बुक रीडिंग की आदत विकसित करने के लिए बाल पुस्तकालयों की शुरुआत की है। योजना के तहत प्रदेश भर में ऐसे 200 बाल पुस्तकालयों का संचालन किया जाना है। जिसकी शुरुआत राजधानी जयपुर से की गई है। राजधानी में भटटा बस्ती, लंकापुरी सहित कई जगहों पर कुछ समय पूर्व यह लाइब्रेरी शुरू की गई है। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
घर में ही बनाई लाइब्रेरी
इन लाइब्रेरीज की खासियत यह है कि इनका संचालन घरों में वॉलेंटियर आधार पर किया जा रहा है। जिस एरिया मे लाइब्रेरी शुरू की जाती है उस एरिया में किसी एक व्यक्ति की तलाश की जाती है जो वॉले ंटियर के रूप में अपने घर में लाइब्रेरी शुरू करने का उत्सुक हो, इसके लिए उसे कोई मानदेय नहीं दिया जाता, प्रथम इस लाइब्रेरी के लिए हिंदी और अंग्रजी में रोचक किस्से कहानियों की किताब उपलब्ध करवाता है। लाइब्रेरी में बैठने के लिए जगह, कुर्सी टेबल या दरी पटटी आदि की व्यवस्था स्वयंसेवक खुद करते हैं।
घर ले जाने की सुविधा
स्कूल जाने वाले बच्चों के समय का ध्यान रखते हुए लाइब्रेरी का समय शाम का रखा गया है। लाइब्रेरी शाम चार बजे से पांच बजे तक और पांच से छह बजे तक संचालित की जाती है। लाइब्रेरी में आने वाले बच्चे किताब अपने साथ भी लेकर जा सकते हैं। इससे बच्चों के साथ उनके भाई बहन या अभिभावक भी इन्हें पढ सकें और उनमें भी बुक रीडिंग के प्रति रुचि जाग्रत हो सके। लाइब्रेरी में बुक रीडिंग सेशन के साथ ही अलग अलग एक्टिविटीज करवाई जाती हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व का विकास हो सके।
आ रहे सकारात्मक परिणाम
प्रथम राजस्थान की ओर से शुरू की गई इस लाइब्रेरी के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। बच्चों के साथ अब उनके अभिभावक भी लाइब्रेरी में आने लगे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि जो किताबें यहां बच्चों को पढने के लिए दी जाती हैं वह इतनी रुचिकर हैं कि किताबों के प्रति बच्चों की रुचि बढने लगती है। प्रथम का लक्ष्य है कि एक बच्चा कम से कम इस लाइब्रेरी में 100 किताबें अवश्य पढे।
इनका कहना है,
प्रथम की ओर से देश के कई शहरों में इस प्रकार की लाइब्रेरी चलाई जा रही हैं। दिल्ली में यह लाइब्रेरी मोहल्ला लाइब्रेरी के नाम से संचालित हो रही हैं वहीं राजस्थान में इन्हें बाल पुस्तकालय के नाम से संचालित किया जा रहा है।
कुलभूषण कोठारी, मैनेजिंग ट्रस्टी
प्रथम राजस्थान।