15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रोफेसर मनोज लोढ़ा की बर्खास्तगी तय

हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर मनोज लोढ़ा की बर्खास्तगी तय मानी जा रही है। हाल ही विवि की बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बोम) की बैठक में लोढ़ा की नियुक्ति का मामला छाया रहा। मामले में सुनवाई के लिए गठित उप समिति ने बैठक में अपनी रिपोर्ट पेश की। इसके अनुसार लोढ़ा पद के लिए अयोग्य हैं। बोम के 9 सदस्यों ने रिपोर्ट पर सहमति जताई और इसे स्वीकार भी कर लिया। एक सदस्य ने आपत्ति दर्ज करवाई है। अब अगली बैठक में कार्रवाई पर निर्णय होगा।

2 min read
Google source verification
d_fki9hu8aeiaon.jpg

हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर मनोज लोढ़ा की बर्खास्तगी तय मानी जा रही है। हाल ही विवि की बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बोम) की बैठक में लोढ़ा की नियुक्ति का मामला छाया रहा। मामले में सुनवाई के लिए गठित उप समिति ने बैठक में अपनी रिपोर्ट पेश की। इसके अनुसार लोढ़ा पद के लिए अयोग्य हैं। बोम के 9 सदस्यों ने रिपोर्ट पर सहमति जताई और इसे स्वीकार भी कर लिया। एक सदस्य ने आपत्ति दर्ज करवाई है। अब अगली बैठक में कार्रवाई पर निर्णय होगा।

पहले भी हुई जांच

इससे पहले भी लोढ़ा की नियुक्ति पर लगे आरोपों की जांच के लिए तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया गया था। जांच में कमेटी ने नियुक्ति के समय दिए गए लोढ़ा के दस्तावेज को प्रामाणिक नहीं मानते हुए उन्हें अपात्र माना था। समिति ने 22 अप्रेल को हुई बोम बैठक में यह रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट के आधार पर बोम सदस्यों ने लोढ़ा को बर्खास्त करने की सहमति दी। लेकिन लोढ़ा ने बताया कि समिति ने उनकी सुनवाई नहीं की। इसके बाद उनको सुनवाई का एक और मौका देने का निर्णय लिया गया। बोम सदस्य प्रोफेसर अपूर्वानंद और डॉ. अमर सिंह की उप समिति बनाई गई। लेकिन लोढ़ा ने समिति को जो स्पष्टीकरण दिया, वह संतोषजनक नहीं मिले।

कार्रवाई से पीछे क्यों हट रहा विवि

लोढ़ा की नियुक्ति की जांच के लिए विवि तीन कमेटियों का गठन कर चुका है। तीनों ने लोढ़ा को अयोग्य माना है। बोम बैठक में भी बर्खास्त करने पर सहमति बन चुकी। इसके बाद भी विवि लोढ़ा पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

यह है नियुक्ति पर विवाद

डॉ. लोढ़ा की नियुक्ति वर्ष 2013 में पिछले पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कार्यकाल में हुई थी। उन्होंने आवेदन में स्वयं अपना शिक्षण अनुभव 4 वर्ष 8 माह बताया था, जबकि यूजीसी नियमों के अनुसार उनका अनुभव 8 साल का होना चाहिए था। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2003 में अमरीका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक छात्र को उदयपुर में पीएचडी कराने का दावा किया था, लेकिन आवेदन के दस्तावेज के अनुसार उनकी खुद की पीएचडी वर्ष 2006 में हुई है। तब लोढ़ा की नियुक्ति को लेकर शिकायत की कई थी।