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क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ की जयंती पर प्रदेशभर में कार्यक्रम, जानें स्वतंत्रता में क्या था योगदान…

क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशभर में सोमवार को कई कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। जगह-जगह विचार गोष्ठी, सम्मेलन, वाहन रैली का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजधानी जयपुर में भी वाहन रैली आयोजित होगी।

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क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ की जयंती पर प्रदेशभर में कार्यक्रम

क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ की जयंती पर प्रदेशभर में कार्यक्रम

जयपुर। क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशभर में सोमवार को कई कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। जगह-जगह विचार गोष्ठी, सम्मेलन, वाहन रैली का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजधानी जयपुर में भी वाहन रैली आयोजित होगी। वाहन रैली की पिछले कई दिनों से तैयारियां की जा रही है। यह रैली सोमवार को सुबह मुरलीपुरा स्थित माताजी के मंदिर से सुबह नौ बजे रवाना होगी। जिसके बाद वाहन रैली प्रताप सिंह बारहठ चौराहा, सीकर रोड होते हुए विद्याधर नगर स्थित प्रताप सिंह बारहठ पार्क तक जाएगी। पार्क में सभा भी की जाएगी और बारहठ को श्रद्धा सुमन अर्पित किया जाएगा। जयंती का मुख्य कार्यक्रम शाहपुरा में आयोजित हो रहा हैं। जहां पर प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होंगे।

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बता दें कि केसरी सिंह बारहठ का जन्म 21 नवंबर, 1872 को राजस्थान की शाहपुरा रियासत के देवपुरा गांव में हुआ था। उनके पिता कृष्ण सिंह बारहठ जागीरदार थे। उनकी शिक्षा उदयपुर में हुई, जहां उन्होंने बंगाली, मराठी, गुजराती, संस्कृत आदि भाषाओं का अध्ययन किया। इसके साथ ही इतिहास, भारतीय और यूरोपीय दर्शन, खगोलशास्त्र, ज्योतिष आदि में विशेष पढ़ाई की।

1910 में की 'वीर भारत सभा' की स्थापना
क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ का यह मानना था कि देश की आजादी का माध्यम सशस्त्र क्रांति ही हो सकता है। इसलिए वर्ष 1910 में उन्होंने ‘वीर भारत सभा’ की स्थापना की थी। प्रथम विश्वयुद्ध 1914 के समय से ही क्रांतिकारी सशस्त्र क्रांति की तैयारी में जुट गए। इसे सफल बनाने के लिए बारहठ ने अपनी दो रिवाल्वर क्रांतिकारियों को दिए और कारतूसों का एक पार्सल बनारस के क्रांतिकारियों को भेजा व रियासती और ब्रिटिश सेना के सैनिकों से संपर्क किया। केसरी सिंह को शाहपुरा में ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली-लाहौर षड्यन्त्र केस में राजद्रोह, षड्यन्त्र व कत्ल आदि के जुर्म लगा कर 21 मार्च, 1914 को गिरफ्तार कर लिया। इसके लिए उन्हें राजस्थान से बाहर बिहार की जेल में रखा गया। आखिरकार वर्ष 1920 में उन्हें रिहा कर दिया गया।

पूरे परिवार ने निभाई स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

केसरी सिंह बारहठ को 'राजस्थान केसरी' के नाम से भी जाना जाता है। उनके भाई जोरावर सिंह बारहठ, पुत्र कुंवर प्रताप सिंह बारहठ ने सम्पूर्ण परिवार सहित भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।