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कान में से मवाद, सुनाई कम देना, कान में तेज दर्द तो तुरंत दें ध्यान

कान में से मवाद, सुनाई कम देना, कान में तेज दर्द तो तुरंत दें ध्यान...

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Patients will not get this opportunity without their consent

lower hearing, quick pain in ear,

कान में से मवाद, सुनाई कम देना, कान में तेज दर्द तो तुरंत दें ध्यान
जयपुर
कान पर चोट लगने या कोई दुर्घटना होने से पर्दा फटने की शिकायत अक्सर सुनी जाती है। कान का पर्दा फटने पर अंदर क्या रिएक्शन होता है यह कोई नहीं जान पाता। पर्दा फटने पर यदि सही समय पर उसका उपचार हो तो उसका ठीक होना संभव है। ध्यान नहीं दिया तो हमेशा के लिए बहरे हो सकते हो।


ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. दीपांशु गुरनानी ने जागरुकता कार्यक्रम में कहा कि हमारे कान में मध्य कर्ण से अंत: कर्ण के बीच त्रिस्तरीय पर्दानुमा संरचना होती है, जिसे चिकित्सीय भाषा में टिम्पैनिक मेम्ब्रेन या ईयर ड्रम भी कहते हैं। कोई भी ध्वनि इस पर्दे पर जो कंपन पैदा करती है वहीं छोटी हड्डियों के माध्यम से भीतरी कान तक पहुंचती है। भीतरी कान से आवाज दिमाग तक पहुंचती है तो हम वो आवाज सुन पाते हैं और उसका मतलब समझ पाते हैं। यदि किसी कारण से कान का पर्दा फट जाता है तो मध्यकर्ण में इंफेक्शन हो सकता है साथ ही श्रवणशक्ति भी जा सकती है। इसके लक्षणों में कान में से मवाद आना, सुनाई कम देना, कान में तेज दर्द होना, भारीपन पहसूस होना, सिर चकराना प्रमुख हैं।


कई तरह के इलाज संभव -:
डॉ. दीपांशु ने बताया कि कान का पर्दा फटने पर ईएनटी विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेने की आवश्यकता होती है। ऑडियोमेट्री, सीटी स्कैन, एक्सरे आदि से इसकी जांच कर इंफेक्शन के स्तर का पता लगाया जा सकता है। कई बार नर्व के खराब होने पर भी श्रवण शक्ति ? वापस नहीं आती। ऐसे में कान में मशीन लगाने के अलावा कोई और उपाय नहीं रहता। इसके इलाज में कान में माइरिंगोप्लास्टी से पर्दे को वापस बनाया जाता है। इसके लिए कान के ऊपर की स्कैल्प से चमड़ा लेकर छेद पर लगाया जाता है। कान के पर्दे में इंफेक्शन है तो उसके लिए टिम्पैनोप्लास्टी की जाती है। इंफेक्शन या चोट के कारण कान की तीन हड्डियों में से एक भी ज्यादा क्षतिग्रस्त हो जाए तो ओसिकुलोप्लास्टी की मदद ली जाती है। इसके अलावा मास्टोयडैक्टौम से भी कान के पर्दे का इलाज किया जाता है।