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राज्य सरकार ने सांसदों से कहा… संसद में राजस्थान से जुड़े मुद्दों को उठाओ

  संसद का शीतकालीन सत्र दिसंबर मेंराज्य सरकार का जल जीवन मिशन में केंद्रीय सहायता बढ़ाने पर सबसे ज्यादा फोकस

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राज्य सरकार ने सांसदों से कहा... संसद में राजस्थान से जुड़े मुद्दों को उठाओ

राज्य सरकार ने सांसदों से कहा... संसद में राजस्थान से जुड़े मुद्दों को उठाओ

अरविन्द सिंह शक्तावत

जयपुर. केंद्र और राज्य सरकार के रिश्ते तो जगजाहिर है। केंद्र से जुड़े कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर आज तक विवाद की स्थिति बनी हुई है। ईआरसीपी का मुद्दा हो या फिर गुर्जर आरक्षण आंदोलन के समय दर्ज किए गए मुकदमोें का मामला। केंद्र ने इन मामलों में राज्य सरकार के आग्रह को स्वीकार नहीं किया है। कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर राजस्थान से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए सभी सांसदों को पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि दिसंबर में संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में वे राजस्थान से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र से प्रश्न पूछें। राज्य सरकार ने मंत्रालयों से जुड़े मुद्दे और संसद में क्या प्रश्न पूछ सकते हैं, यह भी लिखकर सांसदों को भेजा है।

राज्य सरकार ने केंद्र के 24 मंत्रालयों से जुड़े राजस्थान के मुद्दों की जानकारी सांसदों को भेजी है। इनमें सबसे ज्यादा मुद्दे जल जीवन मिशन और गृह मंत्रालय से जुड़े हुए हैं। कई मुद्दे तो ऐसे हैं, जो बरसों से ही लंबित चले आ रहे हैं, लेकिन उनका कोई हल नहीं निकल रहा। जल जीवन मिशन से जुड़े राज्यों को लेकर राज्य सरकार ने सांसदों से कहा है कि राजस्थान उन राज्यों में शामिल हैं, जहां पानी की हमेशा कमी रहती है। ऐसे में जल जीवन मिशन से जुड़े सभी कार्यों के लिए केंद्रीय सहायता 50% से बढ़ाकर 90% करने के लिए कहा जाए। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के समय दर्ज किए गए मुकदमे भी वापस लेने के लिए रेल मंत्रालय से मांग करने को कहा गया है। आंदोलन के समय कई जिलों में रेल पटरियों को उखाड़ने से संबंधित मुकदमे दर्ज किए गए थे। मुकदमे तभी वापस लिए जा सकते हैं, जब रेल मंत्रालय की सहमति हो।

इन मंत्रालयों से जुड़े मुद्दे उठाने को बोला

जल जीवन मिशन, विद्युत, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, वित्त, गृह, उपभोक्ता मामले- खाद्य एवं सार्वजनिक, कृषि एवं किसान, पर्यावरण वन एवं जलवायु, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, श्रम एवं रोजगार, युवा कार्यक्रम एवं खेल, मानव संसाधन विकास, ग्रामीण विकास, संस्कृति, नवीन एवं अक्षय ऊर्जा, रेल, कोयला, रसायन एवं उर्वरक, नागर विमानन, महिला एवं बाल विकास, खान, सहकारिता, शिक्षा, रक्षा।

पत्र में इनको किया शामिल
जल जीवन मिशन में केंद्रीय सहायता का हिस्सा 50% से बढ़ाकर 90% की जाए।

ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया जाए।

जल जीवन मिशन की अवधि को 2026 तक बढ़ाया जाए।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत केंद्रीय अंश की राशि रिलीज की जाए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केंद्रीय सहायता का हिस्सा बढ़ाया जाए।

वन अधिनियम के तहत पीएमजेएसवाई योजना में सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी जाए।

राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना के तहत पुष्कर सरोवर कार्य की शेष केंद्रीय हिस्सा जारी किया जए।

जीएसटी मुआवजे की अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाई जाए।

जालोर, प्रतापगढ़ और राजसमंद में मेडिकल कॉलेज खोले जाएं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बकाया एक हजार 198 करोड़ रुपए जारी किए जाएं।

अजमेर, सवाईमाधोपुर वाया टोंक रेल लाइन परियोजना स्वीकृत की जाए।

गुलाबपुरा में मेमू कोच फैक्ट्री की स्थापना की जाए।

जयपुर हवाई अड्डे पर हैंगर और वीआइपी ब्लॉक के निर्माण के लिए भूमि का आवंटन हो।

धोखाधड़ी में लिप्त मल्टीस्टेट क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटीज के विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकारों को अतिरिक्त शक्तियां दी जाए।

भाजपा सरकार ने की थी शुरुआत

भाजपा की तत्कालीन सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष राजस्थान के मुद्दों कोे उठाने की मांग रखने के लिए सांसदों को पत्र लिखने की शुरुआत की थी। हालांकि, आज तक ऐसा कम ही देखने में आया है, जब किसी सांसद ने राज्य सरकार को ओर से भेजे गए पत्रों को लेकर ज्यादा गंभीरता दिखाई हो।

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