प्रदेश में गत दो वर्षों में बजरी की 122 खानें नीलामी के जरिए आवंटित की गई है, लेकिन पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र अभी तक मात्र 4 बजरी खानों को ही मिले हैं। इससे वर्तमान में संचालित बजरी खानों से प्रदेश की मांग की पूर्ति नहीं हो पा रही। इसका फायदा खनन माफिया उठा रहा है और जनता महंगी बजरी खरीदने को मजूबर है।