Rajasthan Assembly Election 2023 : विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चयन से पहले फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है।
जयपुर/ भवनेश गुप्ता
Rajasthan Assembly Election 2023 : विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चयन से पहले फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। प्रदेश की 44 में से कुछ सीट ऐसी हैं जहां पार्टी कमजोर है, वहीं कुछ सीटों पर कांग्रेस से सीधे मुकाबले की उम्मीद है। यही वजह है कि पार्टी इन सभी सीट पर अपने ही सर्वें को क्रॉस चैक कर रही है। इसमें पता लगाया जा रहा है कि सर्वे में जो मजबूत दावेदारों के नाम आए हैं, वे वाकई में टक्कर देने की स्थिति में हैं या नहीं।
इनमें जयपुर की चार सीट सहित पूर्वी राजस्थान और शेखावटी क्षेत्र की सीटें हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ सीट ऐसी हैं, जहां अब चौंकाने वाले नाम आ सकते हैं। केन्द्रीय नेतृत्व सर्वें काे क्रॉस चैक करा रहा है। पिछले दिनों दिल्ली में केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रदेश के कुछ शीर्ष नेताओं ने अपने-अपने पैनल बताए, लेकिन ज्यादातर नाम अलग-अलग थे। आलाकमान को ये पैनल रास नहीं आए थे।
क्रॉस चैक के दायरे में ये सीट
कांग्रेस विधायक वाली सीटें: सादुलशहर, रायसिंह नगर, खाजूवाला, बीकानेर पश्चिम, कोलायत, सरदारशहर, झुंझुनूं, धोद, कोटपूतली, किशनपोल, हवामहल, आदर्श नगर, सिविल लाइन्स, चाकसू, अलवर ग्रामीण, डीग-कुम्हेर, वैर, सपोटरा, दौसा, निवाई, टोंक, मसूदा, डेगाना, बाड़मेर, सरदापुरा, गुढ़ामलानी, वल्लभनगर, बागीदोरा, निम्बाहेडा, हिंडौली।
भाजपा विधायक वाली सीटें
सूरतगढ़, सांगरिया, पीलीपंगा, नोखा, धौलपुर (अब भाजपा से निष्काषित), मांडलगढ़।
निर्दलीय व अन्य दल
खंडेला, शाहपुरा, बहराेड़, नगर, भरतपुर, महवा, खींवसर।
इन मापदण्ड़़ों पर तोल रहे
- दावेदारों की सक्रियता
- बेदाग चेहरा
- जातिगण समीकरण
- पार्टी की मूल विचारधारा से जुड़ाव
- पार्टी में योदान
-सामाजिक प्रतिष्ठा
पहली सूची से पहले पूरा होगा काम
यह काम प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने से पहले पूरा होगा, क्योंकि इनमें कई सीट ऐसी है, जो संभावित सूची में शामिल है। अभी तक 40 से 45 नाम आने की उम्मीद थी। लेकिन जिस तरह समय निकलता जा रहा है, उस आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि सीट संख्या बढे़गी। हालांकि, पहली सूची के प्रत्याशियों के फाइनल नाम चयन के लिए मशक्कत चल रही है। पहले शीर्ष नेताओं के बीच समन्वय की कमी थी और फिर आरएसएस और संगठन के बीच समन्वय की कमी सामने आ चुकी है। इसी कारण आलाकमान ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष को पिछले दिनों जयपुर भेजा था।
बड़े नेताओं को रणनीतिकार बनाने की कवायद
पार्टी आलकमान संकेत दे चुका है कि अब कुछ शीर्ष नेता चुनाव लड़ने की बजाय रणनीतिकार की भूमिका में आएं। इनमें वरिष्ठ नेता और सांसद भी हो सकते हैं। ऐसे कुछ नेताओं की नींद उड़ी हु्ई है, जो खुद के नाम को इस संकेत से जोड़कर देख रहे हैं।