
परवान पर प्रचार: चलते-रुकते खा रहे खाना, गाड़ी में ही नेताजी को आ रही झपकी
दिवाली खत्म होनेे के साथ ही चुनाव प्रचार ने गति पकड़ ली है। राजधानी में चुनावी माहौल देखते ही बन रहा है। ढोल के साथ जिंदाबाद के नारे हर गली-मोहल्ले से लेकर बाजारों में सुनाई दे रहे हैं। प्रमुख दलों के प्रत्याशी दिनभर में 18 से 20 घंटे तक प्रचार और जनसम्पर्क के लिए निकल रहे हैं। ऐसे में कई प्रत्याशी प्रचार के दौरान ही खाना खा रहे हैं और झपकी भी गाड़ी में ही ले रहे हैं।
सूरज निकलने से पहले प्रत्याशी मॉर्निंग वॉकर्स से मिलकर जनसम्पर्क की शुरुआत कर रहे हैं। दिन चढऩे के साथ कार्यालय में बैठक और उसके बाद फिर से कॉलोनियों में लोगों से और बाजारों में पहुंच व्यापारियों से संवाद किया जा रहा है। प्रत्याशियों को तीन हजार से अधिक घरों तक पहुंचना पड़ रहा है। 23 नवम्बर शाम पांच बजे तक प्रत्याशियों की यही दिनचर्या रहेगी।
हर घंटे एक नुक्कड़ सभा और भाषण
18 से 20 घंटे जनसम्पर्क के दौरान नुक्कड़ सभाएं भी खूब हो रही हैं। औसतन हर घंटे एक बार प्रत्याशी को माइक लेकर बोलना पड़ता है। स्थानीय मुद्दों और समस्याओं का निस्तारण करने की बात प्रत्याशी अपने भाषणों में कर रहे हैं।
गर्दन भी भारी
प्रत्याशी के लिए माला पहनना मजबूरी है, यही वजह है कि प्रत्याशी को तीन से पांच किलो की माला हर समय पहनकर चलनी पड़ रही है। क्योंकि, स्वागत सत्कार के दौरान कोई नाराज न हो, इसका भी प्रत्याशी ध्यान रख रहे हैं।
कुछ ऐसे बदली दिनचर्या
- सुबह चार से पांच बजे के बीच जागना। छह बजे तक प्रचार के लिए पार्कों में पहुंचना। एक दो घरों में चाय पर लोगों और कॉलोनी के प्रबुद्धजनों से मुलाकात करना।
-इसके बाद पार्टी कार्यालय आना और चुनिंदा लोगों के साथ बैठकर अगले दिन के कार्यक्रम को तय करना।
-सुबह 11 बजे वापस लोगों के बीच पहुंच जाना। विकास समितियों के पदाधिकारियों के साथ कॉलोनी और बाजारों में घूमने का सिलसिला।
-रात 12 से एक बजे तक प्रचार रुकता है। इसके बाद अगले दिन को लेकर चर्चा होती है। सोते-साते दो से ढाई बज जाते हैं।
कौन क्या कह रहा
भाजपा प्रत्याशी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रवाद और देश में हुए विकास कार्यों को प्रमुखता से गिना रहे हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी: मौजूदा सरकार के कार्यों, लोगों को फायदा पहुंचाने वाली योजनाओं के बारे में बता रहे हैं।
थर्ड फ्रंट और निर्दलीय: भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को कोस रहे हैं। एक बार विश्वास करने की कहकर वोट मांग रहे हैं।
ये मुद्दे चर्चा में
- पार्कों का विकास नहीं हो रहा है। झूले नहीं है। वॉकिंग ट्रैक क्षतिग्रस्त हैं।
- खस्ताहाल सीवरेज लाइन से लेकर खुले हुए नालों से होने वाली दिक्कत का लोग जिक्र कर रहे हैं।
- सैटेलाइट अस्तपाल की मांग के साथ डिस्पेंसरी में चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने की मांग लोग कर रहे हैं।
- कॉलोनी में सडक़, पीने का पानी भी लोगों की मांग में शामिल है। प्रत्याशी को दिन में तीन-चार बार लोगों के इसी सवाल का जबाव देना होता है।
Published on:
15 Nov 2023 12:29 pm
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