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Rajasthan Vidhansabha : आखिर क्यों सदन में गूंजे ‘मदन नहीं तो सदन नहीं’ के नारे… और हो गया हंगामा?

Rajasthan Assembly Session Latest News and Updates : आखिर क्यों सदन में गूंजे 'मदन नहीं तो सदन नहीं' के नारे... और हो गया हंगामा?

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जयपुर।

राजस्थान विधानसभा में आज सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जमकर हंगामा हुआ। सरकार को घेरने की रणनीति के साथ पहुंचे भाजपा विधायक दल ने विधायक मदन दिलावर के निलंबन का मुद्दा उठाया। प्रश्नकाल के लिए जैसे ही स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने सदन में पहुंचकर कार्यवाही शुरू करवाई, तभी नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के विधायक मदन दिलावर को निलंबित किये जाने का मसला उठा दिया। उन्होंने निलंबन का विरोध करते हुए उसे रद्द करने की अपील की।

इधर प्रश्नकाल में विधायक निलंबन का मुद्दा उठाये जाने का सत्तापक्ष के विधायकों ने विरोध जताया। देखते ही देखते सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बढ़ गया और सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के विधायकों ने 'मदन नहीं तो सदन नहीं', 'मदन दिलावर का निलंबन वापस लो' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए।

हंगामेदार माहौल के बीच स्पीकर सीपी जोशी ने विपक्षी सदस्यों के प्रश्नकाल के सवालों से इतर सवाल उठाये जाने पर नाराज़गी जताई। स्पीकर जोशी ने कहा संसदीय परम्पराओं के निर्वहन में राजस्थान विधानसभा पूरे हिंदुस्तान में आदर्श रही है। प्रश्नकाल से इतर कोई भी सवाल या मुद्दा हो वो शून्य काल में उठाए जा सकते हैं। लेकिन प्रश्नकाल में व्यवधान डालने की परम्परा यहां की नहीं है। स्पीकर ने विधायक निलंबन पर शून्यकाल में बात उठाने की अनुमति दी, तब जाकर प्रश्नकाल में हंगामा शांत हुआ और आगे की कार्यवाही जारी रही।

शून्यकाल में भी हंगामा रहा जारी

स्पीकर के आश्वासन के बाद विधायक मदन दिलावर निलंबन मामले पर शून्यकाल में भी सदन गर्माया रहा। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि 24 जुलाई के दिन जब लाल डायरी प्रकरण पर हंगामा हो रहा था तब मदन दिलावर वेल में आए ज़रूर थे, लेकिन उन्होंने किसी का भी माइक छीनने का प्रयास नहीं किया, इसलिए उनका निलंबन किया जाना सही नहीं है, उनका निलंबन रद्द होना चाहिए।

इधर राठौड़ की इस अपील पर सत्तापक्ष के विधायकों ने ऐतराज़ जताया। विधायक गोविंद सिंह डोटासरा और संयम लोढ़ा ने विरोध जताना शुरू किया तो दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। देखते ही देखते एक बार फिर हंगामे की नौबत आ गई। इस बार गतिरोध इतना ज़्यादा बेकाबू होने लगा कि स्पीकर को सदन की कार्यवाही स्थगित कर देनी पड़ी।