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राजस्थान: राजस्थान में आज से 4 दिन बंद रहेंगी कृषि उपज मंडियां, जानें क्या हैं व्यापारियों की मांगें

राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के आह्वान पर व्यापारी हड़ताल कर रहे हैं। ऐसे में 2 से 5 जुलाई तक प्रदेश की 247 कृषि उपज मंडियां बंद रहेंगी। इसमें मुख्य तौर पर कृषक कल्याण शुल्क और मंडी सेस को पूरी तरह खत्म करने की मांग की गई है।

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जयपुर

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Arvind Rao

Jul 02, 2025

Rajasthan

राजस्थान में मंडी बंद (फोटो- पत्रिका)

राजस्थान में 2 से 5 जुलाई तक 247 कृषि उपज मंडियां बंद रहेंगी। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के आह्वान पर व्यापारी हड़ताल कर रहे हैं। इसी के तहत सुमेरपुर (पाली) की महाराजा उमेद सिंह कृषि उपज मंडी में भी चार दिन तक कोई बोली या खरीद-बिक्री नहीं होगी।


बता दें कि मंगलवार को सुमेरपुर व्यापार संघ के अध्यक्ष पुखराज सोलंकी और सचिव जितेंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापारियों ने उपखंड अधिकारी और मंडी प्रशासक को ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य तौर पर कृषक कल्याण शुल्क और मंडी सेस को पूरी तरह खत्म करने की मांग की गई।


सरकार ने कृषक कल्याण शुल्क आधा किया


व्यापारियों ने कहा कि सरकार कृषि जिंसों पर एक प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लेती है। पहले सरकार ने इसे आधा प्रतिशत किया था। लेकिन अब 1 जुलाई से फिर से पूरा एक प्रतिशत लग रहा है। इससे किसानों को उनकी उपज का पूरा दाम नहीं मिल पाता और उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का बोझ बढ़ता है।

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व्यापारी और उद्योगों पर भी लागत बढ़ने से कारोबार ठप हो रहा है। व्यापार संघ ने यह भी मांग की कि मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का आदि पर वर्तमान 1 प्रतिशत आढ़त बढ़ाकर 2.25 प्रतिशत की जाए, ताकि व्यापारियों को भी उचित मुनाफा मिले।


23 जून को हुई थी बैठक


राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ ने हाल ही में जयपुर में 23 जून को बैठक की थी। इसमें तय किया गया था कि अगर सरकार 1 जुलाई से शुल्क खत्म या आधा प्रतिशत नहीं रखती, तो 2 जुलाई से 5 जुलाई तक प्रदेशभर में हड़ताल होगी। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि सरकार को कई बार मांगें बताई गईं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसके चलते अब प्रदेशव्यापी विरोध जरूरी हो गया है।


ये हैं व्यापारियों की प्रमुख मांगें


-कृषक कल्याण शुल्क अगले 3 वर्षों तक 0.50 प्रतिशत किया जाए।
-राज्य के बाहर से आने वाली कृषि उपज पर मंडी सेस और कृषक कल्याण शुल्क न लगे।
-चीनी पर शुल्क पूरी तरह हटाया जाए।
-मोटे अनाज पर आढ़त 2.25 प्रतिशत लागू हो।
-मंडियों में किराए की दुकानों को सस्ती दर पर मालिकाना हक दिया जाए।
-अजमेर मंडी की जली हुई दुकानों का तुरंत निर्माण कराया जाए।
-बीकानेर, टोंक, खेरली, नोखा और गंगापुरसिटी सहित अन्य मंडियों की जमीन और दुकान से जुड़ी समस्याओं का स्थायी हल निकाला जाए।
-पुरानी मिलों को भी नई मिलों जैसी छूट दी जाए।
-एमनेस्टी स्कीम लाकर ब्याज और पेनल्टी माफी दी जाए।


व्यापार संघ की चेतावनी


व्यापार संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तो आंदोलन और भी बड़ा और सख्त किया जाएगा। चार दिन तक मंडियां बंद रहने से किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी होगी और आम जनता को भी खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। व्यापारी संघ ने सरकार से अपील की है कि वह जल्दी से जल्दी इसका हल निकाले और हड़ताल खत्म कराए।

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