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Rajasthan News : बाज़ारों में पहुंच गया नामी ब्रैंड का ‘असुरक्षित’ सरसों तेल, अब वापस मंगवाने की जुगत शुरू

Rajasthan में मिलावटखोरों पर बड़ा एक्शन हुआ है। टैगोर ब्रांड (Tagore Brand) सरसों तेल के 3 बैच को जांच में असुरक्षित घोषित कर उनकी बिक्री और स्टॉक पर तुरंत रोक लगा दी गई है।
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Sarso Mandi Bhav

फाइल फोटो- पत्रिका

राजस्थान की भजनलाल सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे 'शुद्ध आहार मिलावट पर वार' अभियान के तहत जयपुर में एक चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। दरअसल, खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देश में हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बाजारों में बिक रहे एक नामी ब्रांड के सरसों तेल को स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह 'असुरक्षित' घोषित कर दिया गया है। खाद्य प्रयोगशाला जयपुर से प्राप्त हुई विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने एम/एस गोयल ऑयल उद्योग (M/S Goyal Oil Industry) द्वारा निर्मित 'टैगोर ब्रांड' (Tagore Brand) सरसों के तेल के चुनिंदा बैचों की बिक्री, वितरण, निर्माण, भंडारण और दुकानों पर प्रदर्शन करने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रशासन के इस औचक एक्शन के बाद पूरे राजस्थान के तेल बाजार और थोक व्यापारियों के बीच हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर हज़ारों परिवारों की रसोई और उनकी सेहत से जुड़ा बेहद गंभीर मानवीय मामला है।

बैच नंबर 1, 2 और 10 असुरक्षित

खाद्य आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विभाग की टीम ने पिछले दिनों बाजार से 'टैगोर ब्रांड' सरसों तेल के विभिन्न सैंपल कलेक्ट किए थे। जयपुर की सेंट्रल फूड लैब में जब इन सैंपलों की गहन वैज्ञानिक जांच की गई, तो इस ब्रांड के बैच नंबर 1, बैच नंबर 2 और बैच नंबर 10 के स्टॉक को मानकों पर बेहद खराब और मानव स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह हानिकारक व असुरक्षित पाया गया।

लैब की इस फाइनल रिपोर्ट के आते ही उच्च स्तर पर बैठक बुलाई गई और बिना कोई देरी किए इन तीनों विशेष बैचों के संपूर्ण बाजार स्टॉक को सीज करने और उन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के कड़े आदेश जारी कर दिए गए।

2 महीने के लिए लागू रहेगा यह कड़ा प्रतिबंध

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम के तहत यह प्रतिबंध प्रारंभिक रूप से आगामी 2 माह या नियमानुसार निर्धारित कानूनी अवधि तक पूरी तरह प्रभावी रहेगा।

इस अवधि के दौरान यदि राजस्थान के किसी भी जिले में इस प्रतिबंधित बैच का तेल बिकता हुआ पाया गया, तो संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर और निर्माण इकाई के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSAI Rules) के तहत सीधे एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विभाग इस बात की भी गहनता से जांच कर रहा है कि इन असुरक्षित बैचों का कितना स्टॉक राजस्थान के ग्रामीण और शहरी इलाकों के खुदरा बाजारों तक सप्लाई हो चुका है।

'अगर घर में है यह तेल, तो तुरंत लौटाएं'

इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद जयपुर प्रथम के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO I) डॉ. रवि शेखावत ने आम जनता की भलाई के लिए एक जरूरी पब्लिक एडवायजरी जारी की है। डॉ. शेखावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे लिए आमजन की स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोपरि है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने राजस्थान के तमाम उपभोक्ताओं और गृहणियों से विशेष अपील की है कि यदि उनके घर की रसोई में 'टैगोर ब्रांड' सरसों के तेल की बोतल या पीपा उपलब्ध है, तो वे तुरंत उसका बैच नंबर चेक करें। यदि उस पर बैच नंबर 1, 2 या 10 लिखा है, तो उसका खाना बनाने में बिल्कुल भी उपयोग न करें और उसे तुरंत संबंधित किराना दुकानदार या विक्रेता को वापस लौटा दें।

थोक और खुदरा व्यापारियों को अल्टीमेटम

जयपुर सहित पूरे प्रदेश के सभी खाद्य कारोबारियों, थोक डीलरों और रिटेल खुदरा दुकानदारों को भी सख्त हिदायत जारी की गई है। सभी व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों, गोदामों और दुकानों के रैकों की जांच करें और यदि उनके पास इस प्रतिबंधित बैच का कोई भी उत्पाद या कार्टन मौजूद है, तो उसे तत्काल काउंटर से हटाकर अलग कर दें। दुकानदारों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने पास मौजूद प्रतिबंधित स्टॉक की सटीक मात्रा की जानकारी तुरंत नजदीकी खाद्य सुरक्षा विभाग या स्वास्थ्य टीम को लिखित रूप में उपलब्ध कराएं।

मिलावटखोरों पर जारी रहेगा कड़ा प्रहार

राजस्थान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 2026 में सरकार का मुख्य फोकस प्रदेश के हर नागरिक को शुद्ध और मिलावट रहित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। त्योहारों और सामान्य दिनों में भी सरसों के तेल, घी, मावा और मसालों की सैंपलिंग की प्रक्रिया को अब और ज्यादा तेज कर दिया गया है।

जयपुर की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब राज्य के अन्य जिलों में भी एम/एस गोयल ऑयल उद्योग द्वारा सप्लाई किए गए तेल के अन्य बैचों की भी दोबारा रैंडम जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदेश की जनता की थाली तक कोई भी अशुद्ध या असुरक्षित खाद्य पदार्थ न पहुंच पाए।