
राजस्थान बजट। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो रहा है। इससे पहले राज्य सरकार महिला, युवा, उद्यमी, कर्मचारी, प्रोफेशनल और सामाजिक संगठनों से सुझाव लेकर बजट की दिशा तय करने में जुटी है। इसी क्रम में ‘राजस्थान पत्रिका’ ने राजस्थान के जिलों से जमीनी जरूरतों और उनके संभावित समाधानों को संकलित किया है।
सामने आया है कि राजस्थान के जिलों की प्राथमिकताएं कहीं बुनियादी ढांचे, कहीं पानी-ड्रेनेज, रोजगार तो कहीं स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी हैं। बजट में यदि इन मांगों को स्थान मिलता है तो न केवल क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा, बल्कि समग्र विकास को भी गति मिलेगी।
-सैटेलाइट टाउन की घोषणा
सुझाव: जयपुर का विस्तार चारों दिशाओं में हो रहा है। आगरा रोड पर कानोता-बस्सी, टोंक रोड पर चाकसू-शिवदासपुरा, मालपुरा रोड पर रैनवाल-फागी, दिल्ली रोड पर कूकस-अचरोल और सीकर रोड पर चौमूं को सैटेलाइट टाउन घोषित किया जाए। पहले चरण में इन कस्बों को मेट्रो और सिटी बस जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से हर 15 मिनट में जोड़ा जाए। कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद ही आवासीय और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
-इंजीनियरिंग, लॉ और एमबीए के सरकारी कॉलेज
सुझाव: राजधानी में प्रोफेशनल शिक्षा के सरकारी विकल्प सीमित हैं। चरणबद्ध तरीके से इंजीनियरिंग, एमबीए और लॉ के कम से कम तीन-तीन नए सरकारी कॉलेज खोलने की घोषणा की जाए।
-जयपुर ग्रामीणः उपजिला अस्पतालों में ब्लड बैंक
सुझाव: 11 उपजिला अस्पतालों में मौजूद ब्लड स्टोर को सुचारू किया जाए और उन्हें ब्लड बैंक में अपग्रेड किया जाए। इससे सड़क दुर्घटनाओं और प्रसव मामलों में जयपुर रेफर करने की मजबूरी खत्म होगी।
-तहसील मुख्यालयों पर मंडियां
सुझाव: हर तहसील मुख्यालय पर कृषि व सब्जी मंडी खोली जाए। इससे किसानों को उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा।
-बहरोड़ रिंग रोड
सुझाव: हाईवे से जोड़ने वाली रिंग रोड का समयबद्ध निर्माण।
-आधुनिक बस स्टैंड
सुझाव: हाईवे के पास सभी सुविधाओं से युक्त बस स्टैंड बनाया जाए।
-हिण्डौन ड्रेनेज सिस्टम
सुझाव: 92 करोड़ की डीपीआर के अनुसार चरणबद्ध बजट स्वीकृत हो। अभी जलभराव से शहरवासी परेशान हैं और बरसात में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। काम होने से राहत मिलेगी।
-हिण्डौन-करौली-कैलादेवी फोरलेन
सुझाव: बजट में फोर लेन की घोषणा से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुविधा मिले। यह हिण्डौन से करौली और करौली से कैलादेवी तक फोर लेन बने। दूरदराज के श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
-पर्यटन जिला घोषित हो
सुझाव: भरतपुर को गोल्डन ट्रायंगल से जोड़कर डीग, कुम्हेर और बृज क्षेत्र तक पर्यटन सर्किट विकसित किया जाए। यह मांग पिछले 30 वर्ष से अधूरी है।
-सरसों तेल उद्योग को बढ़ावा
सुझाव: सरसों तेल उद्योग के लिए प्रोत्साहन, सब्सिडी और अलग विभाग की व्यवस्था की जाए।
-ईसरदा व बीसलपुर से पर्याप्त पानी
सुझाव: ईसरदा परियोजना को अतिरिक्त बजट देकर तेज किया जाए। तब तक बीसलपुर से पानी की आपूर्ति बढ़ाई जाए।
-दौसा शहर में सीवरेज
सुझाव: बजट आवंटन के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर सीवरेज कार्य शुरू किया जाए। अभी जिला मुख्यालय पर भी सीवरेज सुविधा नहीं है।
-स्मॉग टावर
सुझाव: औद्योगिक प्रदूषण से राहत के लिए स्मॉग टावर लगाए जाएं, जिसकी लागत बजट में शामिल हो। अभी आमजन दूषित, जहरीली एवं धूल भरी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
-बाबा मोहनराम कॉरिडोर
सुझाव: 85 करोड़ की डीपीआर के अनुसार बजट आवंटन कर कार्य शुरू किया जाए। यह महाकाल कॉरिडोर उज्जैन, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाराणसी की तर्ज पर तैयार होना है। डीपीआर बन चुकी है।
-त्रिनेत्र गणेश रोप-वे
सुझाव: घोषित रोप-वे परियोजना के लिए बजट दिया जाए ताकि श्रद्धालुओं की सुविधा और बाघों से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
-अमरूद फूड प्रोसेसिंग यूनिट
सुझाव: राज्य बजट से फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर किसानों की आय बढ़ाई जाए। इससे प्रदेश के सबसे बड़े अमरूद उत्पादक जिले में किसानों को सीधा फायदा होगा।
-जल संकट से निजात
सुझाव: सिलीसेढ़ योजना को प्राथमिकता से लागू किया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाएं विकसित की जाएं। अभी 10 से अधिक ब्लॉक डार्क श्रेणी में आ गए हैं।
-उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार
सुझाव: भिवाड़ी व एमआइए क्षेत्र से शुरुआत कर स्थानीय युवाओं के लिए न्यूनतम प्रतिशत तय किया जाए। कैंपस प्लेसमेंट को बढ़ावा मिले। यहां 9 हजार उद्योगों में स्थानीय के रोजगार की प्राथमिकता तय कराई जाए।
-उद्योग और रोजगार
सुझाव: रीको और उद्योग विभाग जमीन आवंटन प्रक्रिया तेज करें, एमओयू को धरातल पर उतारें। जिले में उद्योग के लिए जगह आवंटन की प्रक्रिया सुस्त है। इससे रोजगार के लिए आगरा, जयपुर, ग्वालियर एवं गुजरात और महाराष्ट्र जाना पड़ रहा है।
-ड्रेनेज सिस्टम सुधार
सुझाव: 265 करोड़ के प्रस्ताव को बजट में मंजूरी देकर शहर को डूब क्षेत्र बनने से बचाया जाए। नहीं तो धौलपुर शहर कई हिस्से डूबत क्षेत्र में पहुंच जाएंगे।
-मेवात विकास
सुझाव: इंडस्ट्री, शिक्षा और सीएसआर परियोजनाओं से रोजगार सृजन किया जाए।
-बृज विकास बोर्ड
सुझाव: बोर्ड में अध्यक्ष नियुक्त कर कामां (कामवन) सहित तीर्थ स्थलों का विकास किया जाए। जैसे उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाना व नंदगांव का किया जा रहा है।
Updated on:
19 Jan 2026 08:47 am
Published on:
19 Jan 2026 08:08 am

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