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राजस्थान में बिना अनुमति नहीं बेच सकेंगे जमीन-जायदाद, इन लोगों पर नहीं होगी रोक, ये रहा कानूनी प्रावधान

राजस्थान कैबिनेट ने अशांत क्षेत्रों में संपत्ति हस्तांतरण रोकने से जुड़े विधेयक 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी। जनसंख्या असंतुलन और सामुदायिक तनाव वाले इलाकों में बिना अनुमति संपत्ति बेचना अवैध होगा। उल्लंघन पर 3-5 साल की सजा का प्रावधान है।

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जयपुर

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Arvind Rao

Jan 22, 2026

Bhajanlal Sharma
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CM Bhajanlal Sharma (Patrika Photo)

Rajasthan Cabinet Meeting: राजस्थान में सामुदायिक तनाव, जनसंख्या असंतुलन और दंगे-फसाद की स्थिति वाले क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की जमीन-जायदाद की सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ‘दि राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इम्मूवेबल प्रोपर्टी एण्ड प्रोविजन फोर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेन्ट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026’ के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई। यह विधेयक आगामी विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा।

विधेयक के तहत ऐसे क्षेत्रों को, जहां किसी समुदाय विशेष के कारण जनसंख्या असंतुलन से सार्वजनिक व्यवस्था और सद्भाव बिगड़ने की स्थिति बनती है तथा दंगे-हिंसा के चलते स्थायी निवासी भयभीत होकर अपनी संपत्तियां बेचने को मजबूर होते हैं, "अशांत क्षेत्र" घोषित किया जा सकेगा। किसी भी क्षेत्र को अधिकतम तीन वर्ष के लिए अशांत घोषित किया जाएगा। स्थिति सामान्य होने पर जांच के बाद इसे पहले ही समाप्त किया जा सकता है। वहीं, आवश्यकता होने पर अवधि बढ़ाई भी जा सकेगी।

बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिहं, खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने संयुक्त प्रेसवार्ता की। संसदीय कार्य मंत्री पटेल ने बताया कि अशांत घोषित क्षेत्रों में सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना अचल संपत्ति का कोई भी हस्तांतरण अमान्य और शून्य माना जाएगा। केवल सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ही संपत्ति का बेचान या ट्रांसफर संभव होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का कानून फिलहाल गुजरात में लागू है, जिसका राज्य सरकार ने अध्ययन भी कराया है।

पटेल ने कहा कि जनसंख्या असंतुलन, सांप्रदायिक तनाव और सार्वजनिक सद्भावना में कमी का असर लंबे समय से कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है। दंगे और भीड़ की हिंसा से उत्पन्न अशांति के कारण कई स्थायी निवासियों को अपनी संपत्तियां कम दामों पर बेचकर क्षेत्र छोड़ना पड़ता है। इस सामाजिक बदलाव और दबाव को नियंत्रित करने के लिए विशेष विधि की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। आमजन और विभिन्न समुदायों की ओर से भी सरकार से ऐसे कदम उठाने का आग्रह किया जा रहा था।

विधेयक के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किया गया अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा, जिसमें 3 से 5 वर्ष तक का कारावास और अर्थदंड का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, संपत्ति को रहन रखने या लोन लेने पर कोई रोक नहीं होगी। सरकार का मानना है कि विधेयक के लागू होने से अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की संपत्तियों और वहां रहने वाले किरायेदारों के अधिकारों को संरक्षण मिलेगा तथा राज्य में सामुदायिक सद्भावना और सामाजिक संरचना को कायम रखा जा सकेगा।

क्या है विधेयक का मकसद

-अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की संपत्तियों की सुरक्षा
-किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण
-सामुदायिक सद्भाव और सामाजिक संरचना को बनाए रखना
अशांत क्षेत्र घोषित होने पर प्रावधान
-बिना अनुमति संपत्ति हस्तांतरण अमान्य
-सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही बेचान संभव
-अवधि अधिकतम 3 वर्ष, जरूरत पर बढ़ाई जा सकेगी

सजा और अपराध की प्रकृति

-उल्लंघन पर अपराध संज्ञेय व गैर-जमानती
-3 से 5 वर्ष तक कारावास
-अर्थदंड का भी प्रावधान

किन पर नहीं होगी रोक

-संपत्ति को रेहन रखने पर
-बैंक या अन्य संस्थानों से लोन लेने पर