
Jaipur News: हाईकोर्ट ने बाल सुधार गृह से बच्चों के भागने और फोन के जरिए उनके बाहर बैठे लोगों को धमकी देने की घटनाओं की कुंडली खंगालना शुरू किया है। कोर्ट ने ऐसे मामलों पर सख्ती दिखाते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रमुख सचिव व निदेशक से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की, वहीं जयपुर के पुलिस आयुक्त से 5 साल की ऐसी घटनाओं की जानकारी मांगी है।
न्यायाधीश अशोक कुमार जैन ने एक किशोर की निगरानी याचिका खारिज कर दी, वहीं ऐसी घटनाओं को लेकर तीनों अधिकारियों को स्वप्रेरणा से नोटिस जारी किया। याचिका में कहा कि जयपुर महानगर-द्वितीय क्षेत्र की अधीनस्थ अदालत ने हरमाड़ा थाने में किशोर के खिलाफ दर्ज एफआईआर के खिलाफ रिवीजन को खारिज कर दिया। प्रार्थीपक्ष ने कहा कि याचिकाकर्ता लंबे समय से संप्रेषण गृह में है और 13 गवाहों का परीक्षण होना है। इसके विपरीत लोक अभियोजक ने कहा कि संप्रेषण गृह में रहने के दौरान याचिकाकर्ता किशोर वयस्क हो चुका है। इसके अलावा दो बार पीड़ित परिवार को फोन कर धमकियां दी गई। कोर्ट ने इस स्थिति को समाज के लिए गंभीर मानते हुए याचिकाकर्ता को जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने यह दिया आदेश
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रमुख सचिव व निदेशक आठ सप्ताह में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करें।
- जयपुर पुलिस आयुक्त संप्रेषण गृह से संबंधित पांच साल की घटनाओं का विवरण पेश करें।
Published on:
21 Mar 2024 10:40 am
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