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Rajasthan Election 2023: राजस्थान में कांग्रेस-भाजपा के प्रत्याशियों की बढ़ी परेशानी, इन 4 सीटों पर निर्दलीय और तीसरा दल आगे

Rajasthan Election 2023: प्रदेश में कई सीटें ऐसी भी हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय या तीसरे दल के प्रत्याशी से परेशान है। ऐसी सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशियों को ज्यादा पसीना बहाना पड़ रहा है।

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जयपुर

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Kirti Verma

Nov 22, 2023

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rajasthan election 2023: प्रदेश में कई सीटें ऐसी भी हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय या तीसरे दल के प्रत्याशी से परेशान है। ऐसी सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशियों को ज्यादा पसीना बहाना पड़ रहा है। इनमें आदिवासी क्षेत्र और पूर्वी राजस्थान की दो-दो सीट शामिल है। आसपुर, बयाना, चौरासी, भादरा सीट पर भाजपा- कांग्रेस प्रत्याशी परेशान नजर आ रहे है। वहीं रायसिंह नगर में भी टक्कर की स्थिति बनी हुई है।

आसपुर
यहां भाजपा ने मौजूदा विधायक गोपीचंद मीना और कांग्रेस ने नए चेहरे राकेश रोत को टिकट दिया है। वहीं भारतीय आदिवासी पार्टी (बाप) से उमेश दामोर फिर सेमैदान में है। दामोर पिछले चुनाव में 5330 वोट मार्जिन से हार गए थे, लेकिन उसके बाद पांच सालक्षेत्र में सक्रिय रहे। पहले ही फिल्डिंग जमाने और जातिगत समीकरणों को साधने में माहिर होने के कारण मैच में टक्कर दे रहे हैं। वहीं भाजपा भी यहां लगातार पिछले दो चुनाव से प्रभाव जमाए हुए हैं, लेकिन आदिवासी बेल्ट में 'बाप' के प्रत्याशी की पकड़ कुछ ज्यादा होने के कारण चिंता में है। कांग्रेस के पास नया चेहरा जरूर है, लेकिन अच्छी फिल्डिंग जमाने का अब ज्यादा समय नहीं है।

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चौरासी
बीटीपी के टिकट से विधायक राजकुमार रोत इस बार भारतीय आदिवासी पार्ट से मैदान में हैं। क्षेत्र में सक्रियता रही है, वहीं भाजपा से इस बार भी सुशील कटारा मैदान में हैं। पिछला चुनाव हारने की भरपाई में जुटे हैं। कांग्रेस ने ताराचंद को टिकट दिया है। कांग्रेस के लिए मुश्किल यह है कि टिकट नहीं मिलने से इसी पार्टी के महेन्द्र बरजोड़ निर्दलीय मैदान में उतरे हैं। इससे वोटों में बिखराव की आशंका है।

बयाना
कांग्रेस ने मौजूदा विधायक अमरसिंह जाटव को उतारा है। वहीं भाजपा से पूर्व विधायक बच्चू सिंह बंशीवाल मैदान में हैं। यहां भाजपा से बागी होकर निर्दलीय ताल ठोक रही रितु बानावत ने दोनों ही दल के प्रत्याशियों की परेशानी बढ़ा दी है। एससी मतदाताओं में अच्छा प्रभाव होने के कारण बानावत थोड़ी सहज दिख रही है। पिछले चुनाव में भाजपा से लड़ीं, लेकिन 6695 बोट मार्जिन से हार का सामना करना पड़ा था। पहले भी दो बार बागी होकर चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन हार मिली थी। चुनाव लड़ने का अनुभव से प्रबंधन का फायदा मिल रहा है। इनके पति ऋषि बंसल जिलाध्यक्ष थे, लेकिन पत्नी के बागी होते ही इस्तीफा दे दिया। जिलाध्यक्ष का फायदा भी मिलता नजर आ रहा है।

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भादरा
भाजपा से संजीव कुमार और कांग्रेस से अजीत सिंह चुनावी रण में है। इनके सामने वर्तमान विधायक बलवान पूनिया सीपीआई (एम) पुरजोर तरीके से डटे हुए हैं। जातिगतण समीरकणों की बात करें तो पूनिया की मतदाताओं में पकड़ कुछ बढ़ी है, लेकिन यह वोट में कितना कनवर्ट, यह भविष्य बताएगा। भाजपा से संजीव कुमार पिछला चुनाव हार गए थे, लेकिन इस बार ज्यादा फोकस करने के लिए लगातार सक्रियता बढ़ाई है।