
जयपुर।
देश भर में फिल्म पद्मावत पर मचे बवाल के बीच राजस्थान की पूर्व राज्यपाल मार्गेट आल्वा की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। आल्वा ने कहा है कि देश में सबको अपनी बात रखने का हक है। लेकिन देश बेवजह प्रदर्शनों से डरता भी नहीं है। देश किसी से डरने वाला नहीं है।
आल्वा यहां जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होने पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि पदमावत फिल्म को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट की राय मानते हैं। जो लोग फिल्म नहीं देखना चाहते वे नहीं जाएं। आप दूसरों को नहीं रोक सकते।
फेस्टिवल के पहले दिन उमड़ी भीड़
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पहले ही दिन लोगों की भीड़ उमड़ी। सुबह ग्वालिर घराने की मीता पंडित ने हे गंगे त्रिवेणी दयानी दुख हरनी सुख करनी राग देश से कार्यक्रम शुरू किया। 'दीवाना कर गयो श्याम रे' भजन भी मीता पंडित ने प्रस्तुत किया। इस पर लोग झूम उठे।
इसके बाद नाथू सिंह सोलंकी की टीम ने नगाड़ा बजाया। लोक कलाकारों ने गैर नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं आसाम के कलाकारों ने बीहू नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम संयोजक संतोय राय ने लोगों का स्वागत किया।
विसंगतियों से जन्म निकलता है हास्य व्यंग्य
कवि संपत सरल ने 'हंंसो-हंसो फिर हंसों' कार्यक्रम में तीन लघु कथाएं सुनाई। उन्होंने कहा कि विसंगतियों से जन्म निकलता है। जब तक समाज मेें पाखंड रहेगा व्यंग्य बनता रहेगा। उन्होंने आदर्श गांव का उदाहरण देकर बताया कि गांव का व्यक्ति सहज होता है। हास्य का जन्म करुणा से होता है। इसके लिए किताब की जरूरत नहीं है।
आठवां तत्व नेता
कवि संपत सरल ने नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रकृति के पांच तत्व हैं। इनमें अब आधार कार्ड और पैन कार्ड दो अलग से जुड गए। आठवां तत्व नेता को बताया। उन्होंने कहा कि वे पदमावत लिखते तो चरित्र ऐसा होता कि अलाउदीन आत्महत्या कर लेता।
कार्यक्रम की शुरूआती सत्र में पूर्व राज्यपाल मारग्रेट अलवा के अलावा डिग्गी पैलेस के रामप्रताप, ज्योतिका और जाने माने साहित्कार व अन्य लोग मौजूद रहे।
Published on:
25 Jan 2018 03:46 pm

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