4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले अलगोज़ा के बुरे दिन, वादक धोधे खां ने परंपरा बचाने की सरकार से लगाई गुहार

प्रसिद्ध अलगोजा वादक धोधे खां ने अलगोजा वादन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए चिंता जताई है।

2 min read
Google source verification
Algoza

जयपुर/ बाड़मेर।

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों, खासतौर से आदिवासी क्षेत्रों में बजाया जाने वाला वाद्य यन्त्र अलगोज़ा इन दिनों अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। कभी ये यन्त्र दुनिया भर में राजस्थान की अलग ही पहचान कराता था। वहीं अलगोज़ा को बजाने वाले वादक भी अब इस कला को बचाने की गुहार सरकार से कर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्रराजीव गांधी के विवाह समारोह में अलगोजा बजा रातों रात चर्चा में आने वाले राजस्थान के प्रसिद्ध अलगोजा वादक धोधे खां ने अलगोजा वादन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए चिंता जताई है। उन्होंने अलगोज़ा की कला को बचाने की जरुरत बताते हुए कहा है कि सरकार की अनदेखी तथा जागरुकता एवं प्रोत्साहन की कमी के कारण आज यह कला अपना वजूद खोती जा रही हैं।

अपनी पीड़ा बयान करते हुए 85 वर्षीय खां कहते हैं कि राज्य में अलगोजा वादन को प्रोत्साहन नहीं मिलने से अलगोजा वादन की छाप कमजोर पड़ती जा रही हैं और इसमें शामिल लोग रोजीरोटी के संकट के चलते इससे दूर होते जा रहे हैं।

दरअसल, धोधे खां पानी को हाल ही में सरकार की ओर से एक ट्यूबवेल स्वीकृत हुआ है जिसे लेकर वे मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते नहीं थकते, लेकिन उन्होंने उन्हें मिल रही पांच सौ रुपए वृद्धा पेंशन को अल्प बताते हुए कहा कि पानी से पेट नहीं भरता।

धोधे खां ने कहा कि उन्होंने अलगोजा से नाम तो खूब कमाया लेकिन आज इस कला को बचाने वाला कोई नहीं हैं और न ही इसके लिए सरकार या अन्य किसी द्वारा कोई सहायता एवं प्रयास किया जा रहा हैं। उन्होंने मांग की कि उनकी अलगोजा परम्परा को जीवित रखने के लिए योजना के तहत प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसके लिए वह काम करने को तैयार हैं जिससे उन्हें सगुन मिलेगा वहीं उनकी अलगोजा परम्परा आगे बढेगी। उन्होंने अपनी पेंशन बढाये जाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस तरह उन्हें पानी के लिए ट्यूबवेल स्वीकृत किया है, उसी तरह इस परम्परा को ज़िंदा रखने के लिए उन्हें काम देकर उनकी मदद की जा सकती हैं।

उन्होंने बताया कि गत वर्ष मुख्यमंत्री ने बाड़मेर दौरे के दौरान उन्हें पेयजल के लिए ट्यूबवेल स्वीकृत किया था और ट्यूबवेल चालू भी हो गई लेकिन बिजली की खराबी के चलते पिछले कुछ महीनों से ट्यूबवेल बंद पड़ा है। इसके लिए बिजली विभाग के धोरीमन्ना सहायक अभियंता से शिकायत भी की गई लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विवाह समारोह में अलगोजा बजा रातों रात चर्चा में आये धोधे खां के बाद अब राज्य में अलगोजा परम्परा को उनकी तरह परवान चढाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। बाड़मेर जिले के बींजराड़, कुंदनपुर, बुरहान का तला, भूणिया, भलीसर, झड़पा और देरासर गांव 'अलगोजा वादकों के गांव' के नाम से जाने जाते हैं, लेकिन दूधिवा गांव अलगोजा वादक गांवों में शीर्ष स्थान पर है।

बाड़मेर-अहमदाबाद मार्ग पर मांगता गांव से पांच किलोमीटर दूर रेतीले टीलों के बीच स्थित दूधिया गांव ने अलगोजे के सुप्रसिद्ध वादक धोधे खां की सुरीली स्वर लहरियों से ही अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली में आयोजित एशियाड-82 का उद्घाटन समारोह की शुरुआत धोधे खां के अलगोजे की धुनों से हुई थी।

Story Loader