
हाईकोर्ट ऑर्डर
जयपुर। हाईकोर्ट ने नवविवाहित जोड़े की गुहार पर पिछले महीने सुरक्षा दिलाई। अब मायके जा चुकी युवती को साथ भिजवाने की गुहार लेकर युवक हाईकोर्ट पहुंचा, तो युवती ने पति मानने से ही इनकार कर दिया। कोर्ट ने युवती के बयान पर मोहर लगा दी है।
न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार की खण्डपीठ ने युवती के बयान के आधार पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निस्तारित कर दिया। युवक ने कोर्ट में गुहार लगाई कि दोनों ने गाजियाबाद में वैदिक रीति से दो अपे्रल 18 को ही शादी की है।
पिछले महीने दोनों ने सुरक्षा की गुहार की थी और उस पर कोर्ट ने टोंक जिला पुलिस से सुरक्षा दिलाई थी। उसके बाद युवती मायके में रहने लगी, उसे वापस साथ भिजवाने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई। इस पर कोर्ट ने युवती को तलब कर हाईकोर्ट में बयान दर्ज करवाए, तो युवती ने कहा उसे जबरन वाहन से ले जाकर शादी के लिए दवाब बनाया गया।
जबरन कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। मौका मिलते ही वह छूटकर परिवार के पास पहुंची। युवती ने यहां तक कहा कि वह न तो युवक को जानती है और न ही कभी उसने शादी के लिए सम्पर्क किया। अब वह परिवारजनों के साथ रहना चाहती है। कोर्ट ने युवती के बयान के आधार पर उसे परिवार के साथ जाने की इजाजत दे दी।
Published on:
20 May 2018 02:34 pm
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