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म्हारी छोरिया छोरों से कम हैं के, राजस्थान में High Education में लड़कियों ने मारी बाजी

Girls Education In Rajasthan : उच्च शिक्षा में 100 लड़कों पर 108 लड़कियां, 19 वर्षों में हुईं दोगुनी, साल 2000-01 में सौ लड़कों पर थीं महज 54 लड़कियां  

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जयपुर

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Deepshikha

Aug 08, 2019

higher education

म्हारी छोरिया छोरों से कम हैं के, राजस्थान में High Education में लड़कियों ने मारी बाजी

जया गुप्ता / जयपुर. प्रदेश में महिला शिक्षा ( Girls Education Rajasthan ) के सन्दर्भ में अच्छी खबर है। कॉलेजों में लड़कों से ज्यादा लड़कियां उच्च शिक्षा ले रही हैं। प्रदेश में 100 लड़कों पर 108 लड़कियां कॉलेजों में पढ़ रही हैं। पिछले 19 वर्षों में यह आंकड़ा लगभग दोगुना ( Girls Doubled in 19 years) हो गया है।

कॉलेज आयुक्तालय के आंकड़़ों के अनुसार साल 2000-01 में सौ लड़कों पर महज 54 लड़कियां थीं। यह आंकड़़ा 2018-19 में बढ़कर 108 लड़कियां प्रति 100 लड़कों तक पहुंच गया। साल 2008-09 में महज 1.63 लाख लड़कियां कॉलेजों में नामांकित थीं, अब सरकारी व निजी कॉलेजों में 5.80 लाख लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं। साल 2018-19 में प्रदेश में कुल 11.16 लाख विद्यार्थी कॉलेजों में नामांकित थे, जिनमें लड़कियां 5.80 लाख और लड़के 5.36 लाख थे।

महिला कॉलेज पांच गुणा बढ़े

छात्राओं के नामांकन के साथ प्रदेश में महिला कॉलेजों की संख्या भी पिछले बीस वर्षों में करीब 5 गुणा बढ़ी है। साल 1997-98 में प्रदेश में निजी व सरकारी कुल 100 महिला महाविद्यालय थे। यह संख्या अब बढ़कर 468 तक पहुंच गई है। इनमें सर्वाधिक 103 महिला कॉलेज जयपुर व दौसा जिले में राजस्थान विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं। सबसे कम 16 महिला कॉलेज बांसवड़ा, डूगरपुर व प्रतापगढ़ जिलों में हैं। प्रदेश में महिलाओं के लिए 2 विश्वविद्यालय संस्थाएं और 2 निजी विश्वविद्यालय चल रहे हैं।

अजा के अलावा अन्य सभी वर्गों में लड़कों से आगे लड़कियां

छात्राओं के नामांकन में वर्ग वार अनुपात देखें तो भी अनुसूचित जाति वर्ग को छोड़कर अन्य सभी वर्गों में लड़कियां, लड़कों से कहीं आगे हैं। प्रति 100 लड़कों पर सामान्य वर्ग में 118 लड़कियां, अन्य पिछड़ा वर्ग में 109, अल्पसंख्य वर्ग में 107, अनुसूचित जनजाति वर्ग में 102 लड़कियां कॉलेजों में नामांकित हैं। केवल अनुसूचित जाति वर्ग में 100 लड़कों पर 98 ही लड़कियां शिक्षा ले रही हैं।

साल-दर-साल यों बढ़ा आंकड़ा

वर्ष ------------- लड़के -------- लड़कियां

2008-09 ------- 2.29 --------- 1.63
2009-10 -------- 2..50 ------- 1.71

2010-11 -------- 2.53 -------- 1.86
2011-12 -------- 2.83 -------- 2.26

2012-13 ------- 3.00 -------- 2.46
2013-14 ------- 3.10 -------- 2.89

2014-15 ------- 3.66 -------- 3.43
2015-16 ------- 3.82 -------- 3.70

2016-17 -------- 4.65 ------------- 4.67
2017-18 -------- 5.15 -------------- 5.46

2018-19 -------- 5.36 ------------- 5.80
(नामांकन लाख में)


छात्राओं का नामांकन बढ़ने के ये कारण

- शिक्षण व राजकीय शुल्क नहीं : कॉलेज व विश्वविद्यालयों में छात्राओं से शिक्षण शुल्क नहीं लिया जाता। सरकार ने शिक्षण शुल्क के साथ राजकीय शुल्क भी माफ कर दिया है। ऐसे में यूजी-पीजी में प्रतिवर्ष की फीस एक हजार रुपए तक ही होती है।


- छात्रवृत्ति व स्कूटी योजना : मेधावी छात्राओं के लिए पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं। लड़कियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति, मेधावी छात्रा स्कूटी योजना, देवनारायण स्कूटी वितरण एवं प्रोत्साहन राशि योजना आदि। इससे भी मेधावी छात्राओं की संख्या बढ़ी है।

- महिला कॉलेजों की संख्या बढऩा : लड़के-लड़कियों की सहशिक्षा वाले कॉलेज में ग्रामीण परिवेश के लोग लड़कियों को भेजना कम पसंद करते है। अब पिछले 20 वर्षों में महिला महाविद्यालय 5 गुणा बढ़े हैं। इससे भी लड़कियों का नामांकन बढ़ा है।

ये सामाजिक कारण


- जागरूकता : पिछले कुछ वर्षों में समाज में महिला शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। पहले जहां लोग बेटियों को हायर स्कूल में पढ़ाई छुड़वा देते थे, अब कॉलेज भेजने लगे हैं।

- लड़कियों का ऊंचे ओहदे पर पहुंचना : फाइटर प्लेन उड़ाना हो या बड़े बैंक के सीईओ की जिम्मेदारी संभालनी हो, लड़कियों ने खुद को साबित करते हुए कई ऊंचे मुकाम हासिल किए हैं।

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