
जयपुर। नब्बे दिन जंगलों में बंधक की तरह रहा। हर दिन 20-21 घंटे काम करना पड़ता था। खाना कभी मिलता तो कभी भूखे ही सोना पड़ता। यह कहना है खातीपुरा निवासी विक्रमादित्य सिंह राठौड़ (23) का, जो 18 अक्टूबर को रियाद (सऊदी अरब) से लापता हो गया था। वह बुधवार अपराह्न 3.15 बजे फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा। उसके साथ विदेश भेजने वाली कंपनी का एजेंट भी वहां से आया। बुधवार रात वह अपने खातीपुरा स्थित घर पहुंचा। विक्रम ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि उसे रियाद से 170 किमी दूर मरेगवाह नामक स्थान पर भेजा गया। उसके जैसे वहां और भी लोग थे, जिन्हें धोखे से बंधक बना मजदूरों की तरह काम लिया जा रहा है। विक्रम ने बताया कि हम लोग या तो गाडिय़ां चलाते या फिर तारबंदी करते। कुछेक लोग ऊंटों की दौड़ के इंतजाम करते या उनकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाते। हम से 20-21 घंटे काम लेना तो वहां साधारण सी बात थी। घर पहुंचने पर बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने स्वागत किया। मां इचरज कंवर ने बेटे को गले लगाते हुए इसे मां करणी का आशीर्वाद बताया।
भारत सरकार उनको भी बुलाए
मरगेवाह के जंगलों में इस समय 11 लोग बंधक हैं। इनमें से कुछेक भारतीय भी हैं। सरकार को चाहिए कि उनको मुक्त करवाया जाए। गोरखपुर के शाहबुद्दीन अली वहां साढ़े चार साल से फंसे हुए हैं। गोरखपुर में उनका पूरा परिवार है लेकिन वो लौट नहीं पा रहे। यूपी का सोनू भी वहां छह साल से फंसा हुआ है। सूडान के लोग वहां पर अपने ऊंटों के साथ रहते हैं। इन ऊंटों की जंगलों में दौड़ होती है, जिसे वहां के शेख चाव से देखते हैं।
फर्जी वीजा के जरिए काम करवाया
विक्रम ने बताया कि वे वहां पर मखूद वैन हदाल नामक व्यक्ति के लिए काम करता था। वह फर्जी वीजा के जरिए काम करवा रहा था। सभी को इसी तरह फर्जी वीजा से काम करवाया जा रहा है। विक्रम के बुरे दिनों की शुरुआत रियाद पहुंचने के बाद हुई। चार-पांच दिन बाद ही उसे किसी अनजान जगह भेज दिया गया। कहा कि यहां रहकर स्थानीय भाषा सीखो। उसके बाद उन्होंने उसे जंगलों में भेज दिया।
Published on:
01 Feb 2018 07:59 am

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