Rakhi Hajela
केस एक
मूल रूप से जयपुर निवासी लेकिन हरिद्वार में रह रही 72 साल की एक महिला ने आयोग में गुहार लगाई कि उनके बेटे बहू से घर खाली करवाया जाए। वह मकान को बेच कर ट्रस्ट बनाकर जन सेवा करना चाहती है। जब बेटा उनकी सुनता ही नहीं तो वह अपना घर बेटे को क्यों दें। हरिद्वार के एक वृद्धाश्रम में रह रही इस महिला आयोग में अपनी शिकायत लेकर आई। आयोग ने पुलिस को महिला का मकान दिलवाए जाने के लिए पाबंद किया।
केस दो
जिस बेटे को जन्म दिया उसी ने प्रॉपर्टी के चक्कर में मां को उनके ही घर में बंद कर दिया। बहु ने मारपीट की खाना नहीं दिया। बुजुर्ग महिला ने पुलिस मदद ली तो बहु ने महिला आयोग में बुजुर्ग सास के खिलाफ शिकायत कर दी। आयोग ने जब बुजुर्ग महिला को बुलाया तब सारी कहानी साफ हुई और अब आयोग ने बेटे बहु को ताकीद किया है कि महिला के साथ सही व्यवहार किया जाए।
जी हां, महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए महिला आयोग में अब अपने ही बच्चों से सताए बुजुर्ग फरियाद लेकर आ रहे हैं। बच्चों से परेशान होकर माता पिता अपना हक लेने के लिए महिला आयोग का दरवाजा खटखटा रहे हैं। बुजुर्गों को शिकायत है कि उन्हें अनदेखा करने के साथ उनके साथ दुव्र्यवहार किया जा रहा है। पीडि़तों का कहना है कि जब पुलिस उनकी समस्या नहीं सुलझा पाती तो वह आयोग आते हैं और यहां उनकी समस्या का समाधान होता है।
हर रोज आ रहे 20 से अधिक केस
महिला आयोग के पास रोज तकरीबन 20 से अधिक केस आ रहे हैं जिसमें ऐसे केस भी बड़ी संख्या में है जिसमें बुजुर्ग अपने बच्चों से परेशान हैं। बुढ़ापे में जब बच्चों से तिरस्कार मिला तो वह परेशान होकर यहां आते हैं। आयोग के 70 से 80 साल के बुजुर्ग ऐसे ही मामलों को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है।
बहु से नहीं बेटे से शिकायत
खास बात है कि इनमें से अधिकांश केसों में पीडि़त पक्ष को अपनी बहु से कोई शिकायत नहीं है। उन्हें शिकायत है अपने बेटों से। उनका कहना है कि जब बेटा ही बदल गया तो बहु से शिकायत क्या करना।
मेल औरव्हाट्सएप पर अलग
आयोग के पास ईमेल और व्हाट्सएप पर भी शिकायतें आ रही हैं। आयोग कार्यालय में सप्ताह में दो दिन जनसुनवाई की जाती है। जिसमें पीडि़त पक्ष के साथ दूसरे पक्ष को भी बुलाया जाता है और उनकी काउंसलिंग कर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाता है। साथ ही राज्य के विभिन्न जिलों में विजिट कर भी पीडि़त पक्ष से मिलते हैं। कई प्रकरणों में आयोग स्वत: ही प्रसंज्ञान लेता है।
इनका कहना है,
हमारे पास जो केस आते हैं उनमें बुजुर्ग भी बच्चों से परेशान हो कर रहे हैं। अधिकांश केस प्रॉपर्टी से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा भी कई अन्य केस आ रहे हैं।
रेहाना रियाज, अध्यक्ष
राजस्थान राज्य महिला आयोग।
एक्सपर्ट व्यू
कभी माता पिता को भगवान मानने वाले समाज की उनकी स्थिति में बदलाव आया है। आज उन्हें कई घरों में बोझ समझा जाता है। उन पर होने वाले अत्याचार बढ़ रहे हैं। बुजुर्गों के संरक्षण के लिए देश में कानून तो है लेकिन बदनामी के कारण वह मदद नहीं लेते। कई जगह तो वह अपने बच्चों से इतना प्यार करते हैं कि उनकी प्रताडऩा चुपचाप सह लेते हैं। उनकी इस स्थिति में सुधार लाए जाने की जरूरत है।
प्रो. राजीव गुप्ता, समाजशास्त्री।