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राजस्थान का ग्रेनाइट उद्योग संकट में, 1300 उद्योग तकलीफ में, 70 हजार लोग हो सकते है बेरोजगार

राजस्थान का ग्रेनाइट उद्योग संकट के कगार पर है। यहां ग्रेनाइट ब्लॉक प्रोसेस कर निर्यात करने वाली 1300 से अधिक इकाइयां तकलीफ में आ गई हैं, जिनमें कार्यरत 70 हजार से अधिक लोगों पर बेरोजगारी का संकट गहरा गया है।

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राजस्थान का ग्रेनाइट उद्योग संकट में, 1300 उद्योग तकलीफ में, 70 हजार के बेरोजगार होने की आशंका

राजस्थान का ग्रेनाइट उद्योग संकट में, 1300 उद्योग तकलीफ में, 70 हजार के बेरोजगार होने की आशंका

राजस्थान का ग्रेनाइट उद्योग संकट के कगार पर है। यहां ग्रेनाइट ब्लॉक प्रोसेस कर निर्यात करने वाली 1300 से अधिक इकाइयां तकलीफ में आ गई हैं, जिनमें कार्यरत 70 हजार से अधिक लोगों पर बेरोजगारी का संकट गहरा गया है। इन इकाइयों में बैंकों की ओर से उधार दिया गया अरबों रुपया अलग फंसता दिख रहा है। कारण है नेपाल में राज्य से जा रहा ग्रेनाइट ब्लॉक। आपको बता दें कि राजस्थान से ग्रेनाइट टाइल्स की बजाय कुछ इकाइयां खदानों से सीधे ब्लॉक का निर्यात कर रही हैं। अखिल राज्य ट्रेड इण्ड इण्डस्ट्री एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान में नेपाल जाने वाली फिनिशड स्लैब गाड़ियों को नेपाल सीमा पर परेशनियों का सामना करना पड़ रहा है।

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ओवरलोड के नाम पर गाड़ियों से वसूली

ओवरलोड के नाम पर गाड़ियों से अनधिकृत वसूली भी की जा रही है। यह राशि न देने पर उनके साथ मारपीट भी की जा रही है। 42 टन पास माल परिवहन पास गाड़ियों को 35 टन माल लाने पर मजबूर किया जा रहा है। इसके विपरीत ब्लॉक लदी गाड़ियां 100 टन तक माल लेकर नेपाल जा रही है। इससे नेपाल में तो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पनप रही है, लेकिन राजस्थान में संकटग्रस्त हो रही हैं। उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे को लेकर राजस्थान ग्रेनाइट माइनिंग एसोसिएशन, किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन और जिला मार्बल कटर एसोसिएशन राजसमंद ने भी आवाज उठाई है। जालौर ही नहीं अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, राजसमंद समेत अनेक जिलों की पांच हजार से अधिक इकाइयों के सामने संकट है। इन इकाइयों का करोड़ों रुपया अटक हुआ है। उत्पादन घटकर एक तिहाई रह गया है।

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