
जयपुर। गुलाबीनगर ( pink city ) को नेशनल कैपिटल रीजन ( national capital region ) में शामिल करने की कवायद शुरू हो गई है। अगर जयपुर एनसीआर ( Jaipur NCR ) में शामिल हो जाएगा तो विकास के लिए फंड की कभी कमी नहीं आएगी। इस संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आज बैठक हुई, जिसमें प्रस्ताव तैयार किया गया है। अब जल्द ही यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ( Shanti Dhariwal ) की अप्रूवल के बाद प्रस्ताव को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ( NCR planning board ) के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
इसलिए बनाया था NCR
एनसीआर के प्रदेश का अलवर ( Alwar ) और भरतपुर जिला ( bharatpur ncr ) शामिल है। वहीं जयपुर और कोटा काउंटर मैग्नेट सिटी के रूप में एनसीआर में सूचीबद्ध हैं। केंद्र ने दिल्ली ( Delhi NCR ) में बढ़ती आबादी के बोझ को कम करने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड बनाया था। जिनमें हरियाणा ( hariyana ), उत्तर प्रदेश ( UP ) और राजस्थान ( Rajasthan ) को शामिल किया गया था।
दिल्ली की आबादी इन शहरों की तरफ रुख करें इसलिए इन शहरों को दिल्ली की तर्ज पर विकसित किया जाना था। हरियाणा का गुड़गांव और यूपी का नोएडा तो विकास कर गया, लेकिन राजस्थान से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को समय पर प्रस्ताव नहीं भेजे गए, जिसके कारण ये दोनों जिले विकास नहीं कर पाए
राजस्थान से भी मांगी है राय
बताया जा रहा है कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड का सब रीजनल प्लान 2021 तक लागू है। ऐसे में केंद्र ने नए प्लान बनाने के लिए राजस्थान, हरियाण और यूपी से राय मांगी है। तीनों राज्यों को कहा गया है कि वे बताएं कि किन शहरों को एनसीआर में शामिल किया जाना है और किन क्षेत्रों को एनसीआर से बाहर करना है। यही वजह है कि राज्य सरकार विचार कर रही है जयपुर को एनसीआर में शामिल किया जाए। अलवर करीब 5 साल पहले योजना में शामिल हुआ था।
ये होगा फायदा ( Jaipur NCR Benefits )
—जयपुर शहर के आसपास का इलाके का जमकर विकास होगा
—रेपिड ट्रांजिट सिस्टम से जुड़ जाएगा जयपुर, आवागमन होगा आसान
—जयपुर को विकास के लिए मिलेगा फंड
—जेडीए—नगर निगम को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से लेनी पड़ेगी अनुमति
—हर प्रोेजेक्ट के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को भेजना होगा प्रस्ताव
—सब रीजनल प्लान के अनुसार ही जयपुर में होगा काम
—मेट्रो फेज—2 के लिए नहीं आएगी पैसे की कमी
चंद घंटों में पहुंच जाएंगे दिल्ली
अभी जयपुर और कोटा एनसीआर की काउंटर मैग्नेट सिटी में शामिल हैं। यही वजह है कि द्रव्यवती नदी परियोजना ( Dravyavati river project ) के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से 1700 करोड़ रुपए का लोन जयपुर को मिला। अब जयपुर एनसीआर में शामिल होता है तो नेशनल हाइवे ( national highway ) के दोनों तरफ का एरिया शामिल करते हुए समूचे जयपुर में विकास के काम होंगे।
सबसे बड़ा फायदा रेपिड ट्रांजिल सिस्टम ( Rapid Transit System ) का होगा। अभी अलवर जिले तक यह सिस्टम प्रस्तावित है। जयपुर के शामिल होते ही यह सिस्टम जयपुर तक पहुंचेगा और जयपुर के लोग चंद घंटों में दिल्ली पहुंच जाएंगे। हालांकि जेडीए ( JDA ) और नगर निगम ( Nagar Nigam ) को जयपुर में विकास के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के निर्देशों के अनुसार काम करना होगा।
शहर का सब रीजनल प्लान बनेगा और इसके नियम—कायदे सख्त होते हैं। हालांकि केंद्र सरकार से जयपुर को पैसा मिल सकेगा। ऐसे में जयपुर नगर निगम जेडीए के पास पैसे की कोई कमी नहीं रहेगी।
Published on:
07 Aug 2019 06:16 pm
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