
सफाई कर्मचारियों ने निकाला मशाल जुलुस
राजस्थान में जहां एक और राजनीतिक संकट चल रहा है, वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मचारियों ने फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। लगभग तीन महीने से अधिक समय से अपनी मांगों के मुद्दे पर सफाई कर्मचारियों ने मंगलवार की रात को मशाल जुलूस निकालकर आक्रोश व्यक्त किया। यह विरोध प्रदर्शन सफाई-कर्मियों की भर्ती को लेकर किया था। संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने कहा कि राजस्थान स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारी समझौते के अनुसार संशोधित विज्ञप्ति जारी नहीं कर रहे हैं।
कार्य बहिष्कार की दी चेतावनी
मंगलवार की रात को सफाई कर्मचारियों ने जयपुर नगर निगम हेरिटेज मुख्यालय (Jaipur Nagar Nigam) से चांदपोल हनुमान जी मन्दिर तक मशाल जुलुस निकला। इसके साथ ही सफाई कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द से जल्द 30 हजार पदों पर सफाई कर्मचारियों की संशोधित विज्ञप्ति जारी नहीं की तो जयपुर के सफाई कर्मचारी पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे।
गांधीवादी तरीके से सरकार तक पहुंचा रहे हैं मांग
संयुक्त वाल्मीकि सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नन्द किशोर डंडोरिया ने यह भी कहा कि फिलहाल हम लोग गांधीवादी तरीके से अपनी मांग को सरकार तक पंहुचा रहे हैं। लेकिन डंडोरिया ने यह भी साफ कर दिया कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वो आंदोलन से लेकर कार्य बहिष्कार करने से पीछे नहीं हटेंगे। डंडोरिया ने कहा कि वह सफाई कर्मचारियों की भर्ती में वाल्मीकि समाज को उसका हक़ दिलाकर ही रहेंगे
क्या है मामला?
गौरतलब है कि पिछले महीने 13,184 सफाई कर्मचारी भर्ती निकालने की प्रक्रिया को शुरू किया था। लेकिन कई विवादों के कारण उसको निरस्त करना पड़ा। इसमें सबसे बड़ा कारण वाल्मिकी समाज के विरोध का रहा। पिछले महीने की 26 अप्रैल को इस भर्ती की प्रक्रिया पर रोक लगाकर इस विज्ञप्ति को निरस्त कर दिया था। पूरा एक महीने निकलने के बाद भी दोबारा से विज्ञप्ति नहीं जारी करने पर वाल्मिकी समाज का रोष बढ़ता जा रहा है।
राजस्थान स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से आश्वासन दिया गया था कि अप्रैल में विज्ञप्ति को जारी करते हुए प्रदेश की 190 से ज्यादा नगरीय निकायों में 13,184 सफाई कर्मचारियों के पदों पर भर्ती निकाली थी। लेकिन तब वाल्मिकी समाज ने इस भर्ती में समाज को प्राथमिकता देने और आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। समाज के लोगों का कहना था कि इसमें केवल वाल्मिकी समाज के लोगों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए और वाल्मिकी समाज से कोई योग्य व्यक्ति नहीं मिलता तब जाकर दूसरे समाज के लोगों को इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से अप्रैल को विज्ञप्ति जारी की गयी। यह प्रदेश की 190 से ज्यादा नगरीय निकायों में 13,184 सफाई कर्मचारियों के पदों पर भर्ती निकाली थी। लेकिन जैसे ही भर्ती की घोषणा हुई तभी वाल्मिकी समाज ने इस भर्ती में समाज को प्राथमिकता देने और आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। वाल्मीकि समाज के लोगों का यह भी कहना था कि यह भरी केवल वाल्मिकी समाज के लोगों के लिए ही होनी चाहिए और अगर वाल्मिकी समाज से कोई योग्य व्यक्ति नहीं मिलता तो दूसरे समाज के लोगों को इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल किये जाने का प्रावधान किया जाना चाहिए।
15 मई से भरे जाने थे ऑनलाइन आवेदन
इन पदों के लिए ऑनलाइन आवदेन 15 मई से 16 जून तक भरे जाने थे, लेकिन वाल्मिकी समाज के विरोध को देखते हुए सरकार ने इससे पहले ही इस पूरी भर्ती प्रकिया पर पूर्ण रूप से रोक लगाई थी। इस भर्ती में आवदेन करने वालो के लिए इंटरव्यू करवाया जाना था। इसके लिए निकाय स्तर पर एक कमेटी बनानी थी, जिससे वो कमेटी आवेदकों के इंटरव्यू ले सकें। 2018 में भी सफाई कर्मचारियों की भर्ती हुई थी। तब आवदेन की जाँच के बाद आवेदनों की लॉटरी निकाली गई, जिसमें लॉटरी में सफल आवेदकों की सफाई कर्मचारियों के पदों पर नियुक्ति की गई थी।
Published on:
31 May 2023 01:43 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
