
जयपुर। हर साल राज्य के खजाने में 8 हजार करोड़ डालने वाला आबकारी विभाग जल्द नई आबकारी नीति जारी करेगा। नीति इस माह के अंत या फिर फरवरी के पहले सप्ताह में आ सकती है। नई नीति को लेकर विभाग ने प्रस्ताव सरकार को भेज दिए हैं।
माना जा रहा है कि 2 साल से चल रहे शराब ठेकों की इस बार लॉटरी होगी। गत वर्ष चुनाव के चलते राज्य सरकार ने नई नीति जारी करने के बजाय दुकानों की फीस वृद्धि कर नवीनीकरण कर दिया था। लेकिन इस बार राज्य में नई नीति जारी कर लॉटरी कराने की तैयारी की जा रही है। लॉटरी आवेदन शुल्क के रूप में ही सरकार को करीब 1000 हजार करोड़ की आय होगी।
सूत्रों के मुताबिक अंग्रेजी शराब दुकानों की लाइसेंस फीस में 10 से 12 फीसदी की वृद्धि होना तय है। जबकि देसी शराब के ठेकों में भी इतनी ही वृद्धि की जा सकती है। गत वर्ष देशी शराब के ठेके उठाने में आई परेशानी के चलते आबकारी विभाग ने 10 फीसदी की कमी के प्रस्ताव पहले सरकार को भेजे थे। सरकार ने प्रस्तावों को खारिज कर दिया। अब प्रस्ताव वर्तमान में चल रहे कीमत के हिसाब से ही मंगाए गए हैं।
इसमें सरकार के स्तर पर 10 से 12 फीसदी की वृद्धि की जा सकती है। पिछले वर्षों में विभाग को आवेदन शुल्क से ही 600 से 1100 करोड़ तक मिल चुके हैं। एक-एक ठेकेदार 100 से 2000 हजार तक आवेदन करता है। अधिकारियों का मानना है कि यूपी में भाजपा के सत्ता में आने के बाद शराब नीति को लेकर सख्त नियम बनाए हैं। वहीं शराब ठेकों में 40 फीसदी तक की वृद्धि की गई है। वहां के ठेकेदार भी राज्य की ओर रुख कर सकते हैं। इस बार लॉटरी हुई तो बड़ी संख्या में आवेदन आएंगे। इससे राज्य के ठेकेदारों की मॉनोपॉली खत्म होगी।
आयुक्त का सुझाव चर्चा में
नई सरकार बनने के बाद बने आबकारी आयुक्त सोमनाथ मिश्रा का सुझाव विभाग में चर्चा में है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों की बैठक में आयुक्त ने कहा था कि शराब में ऐसा एसेंस मिलवाया जाए कि पीने वाले के मुंह से बदबू नहीं आए। इससे शराब बिक्री में इजाफा होगा। वहीं दुकानों पर विटामिन वाली पौष्टिक चीजों की बिक्री का सुझाव दिया। लेकिन उनके इस सुझाव पर विभागीय अधिकारी सहमत नहीं हुए। अधिकारियों ने कहा कि जब मूल खुशबू खत्म हुई तो यह कोल्ड ड्रिंक बन जाएगी। विटामिन वाले पौष्टिक सामान की बिक्री दुकान पर नहीं किए जाने के कानूनी प्रावधान नहीं होने के बारे में बताया।
लटक सकता है ताला
नई नीति में राज्यभर में रेस्टोरेंट बार पर ताला लगा सकती है। इससे पहले गहलोत सरकार में ही 1999 में रेस्टोरेंट-बार बंद कर दिए गए थे। लेकिन 2004 में इन्हें पुन: चालू कर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि रेस्टोरेंट-बार बंद किए गए तो राजस्व पर कोई खास असर नहीं होगा। पीने वाले दुकान से खरीद के साथ होटल बार में शिफ्ट हो जाएंगे।
Published on:
22 Jan 2019 08:33 am
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