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‘खिड़की’ में बयां हुई संघर्ष की कहानी तो ‘पार्क’ में इंसानी वजूद को लेकर सवाल

रवींद्र मंच पर रविवार को दो नाटकों 'खिड़की' और 'पार्क' का मंचन किया गया।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Oct 17, 2021

'खिड़की' में बयां हुई संघर्ष की कहानी तो 'पार्क' में इंसानी वजूद को लेकर सवाल

'खिड़की' में बयां हुई संघर्ष की कहानी तो 'पार्क' में इंसानी वजूद को लेकर सवाल


रवींद्र मंच पर मंचित हुए दो नाटक
जयपुर
रवींद्र मंच पर रविवार को दो नाटकों 'खिड़की' और 'पार्क' का मंचन किया गया। ''खिड़की' नाटक में एक संघर्ष कर रहे लेखक की कहानी मंचित की गई जिसे एक निश्चित समय में अपनी कहानी सबमिट करनी है,जिसके लिए अभी उसके पास कोई विचार नहीं है। वह बंद कमरे में कई दिनों से कहानी की तलाश में है लेकिन जब भी वो खिड़की से बाहर झांकता है उसे एक लड़की दिखती है और वह उस लड़की को लेकर ख्याल बुनता है।
दूसरे नाटक 'पार्क' में इंसानों के उस इतिहास पर प्रकाश डाला गया है जिस पर कोई इतिहास नहीं लिखा गया। जिस तरह से वर्तमान में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर परोसा जा रहा है उसका परिणाम हम सोच नहीं सकते कि क्या होगा आगे। लोगों को धर्माधंता के नशे में उनकी जगह से बेवजह खदेड़ दिया जाता है। नाटक में दिखाया गया कि यही वह मुद्दे हैं जिससे आप, मैं कभी ना कभी प्रताडि़त हो चुके हैं और यह हालात पूरे विश्व में अमर बैल की तरह फैल गए हैं। हमे तय करना है कि हमारे लिए क्या जरूरत है इतिहास, जगह या फिर इंसान के इंसान होने का वजूद। यह नाटक इन्ही प्रश्नों को हमारे सामने लाता है। नाटकों के लेखक विकास बाहरी और मानव कौल हैं और इनका निर्देशन एमपीएसडी से पास आउट मनीष गोरा और आयुषी जीना ने किया।