स्टेट पुलिस कंट्रोल रूम में स्टाफ बढ़ाने का मामला, मांगे 31 पद , वित्त विभाग लौटा चुका है प्रस्ताव
जयपुर
राज्य पुलिस के स्टेट कंट्रोल रूम में पर्याप्त स्टाफ नहीं है और इससे कार्य प्रभावित हो रहा है। पुलिस मुख्यालय ने कंट्रोल रूम के लिए 31 नए पद मांगे हैं। हालांकि वित्त विभाग एक बार पहले पुलिस मुख्यालय का स्टेट कंट्रोल रूम के लिए पदों का प्रस्ताव लौटा चुका है। अब कंट्रोल रूम के लिए अतिरिक्त स्टाफ आवश्यकता बताते हुए दोबारा प्रस्ताव भेजा गया है, वित्त विभाग में विचाराधीन है।
पुलिस मुख्यालय की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर स्टेट कंट्रोल रूम के लिए स्वीकृत स्टाफ को पर्याप्त नहीं बताया गया है। ऐसे में राज्य विशेष शाखा के दूसरे सेक्शनों के स्टाफ को कंट्रोल रूम के कार्य के लिए अस्थाई रूप से लगाया जाता है। इनमें पुलिस निरीक्षक से हैड कांस्टेबल तक के अधिकारी—कर्मचारियों को अस्थाई लगाते हैं। जब तक वे काम सीखते हैं, तब तक उन्हें मूल विभाग में लगा दिया जाता है, जिससे कंट्रोल रूम का काम प्रभावित होता है।
रिटायरमेंट के नजदीक प्रभारी ...
प्रस्ताव के अनुसार स्टेट कंट्रोल रूम में उप अधीक्षक को बतौर प्रभारी लगाया जाता है, जिनमें अधिकतर रिटायरमेंट के नजदीक होते हैं। इन अधिकारियों को कार्य समझने में समय लगता है और जब तक कार्य को समझकर काम करना शुरू करते हैं, तब तक रिटायर हो जाते हैं। वर्ष 2016 में तीन उप अधीक्षक स्टेट पुलिस कंट्रोल रूम से रिटायर हुए हैं। यही हाल वर्ष 2017 में भी रहा।
आवश्यकता से कम है स्वीकृत नफरी...
स्टेट कंट्रोल रूम में वर्तमान में एक—एक एएसपी—डीएसपी के अलावा इंस्पेक्टर,एसआई,एएसआई,कांस्टेबल कम्प्यूटर फैक्स के तीन—तीन तथा चालक कांस्टेबल का एक पद स्वीकृत है। इसकी तुलना में काम की आवश्यकता को देखते हुए डीएसपी के दो, एसआई—एएसआई के 6—6, कांस्टेबल के 12 तथा ड्राइवर के 5 पदों की अतिरिक्त आवश्यकता बताई गई है।
322 लाख रुपए का वित्तीय भार..
इन पदों के सृजन पर 322 लाख रुपए का सालाना वित्तीय भार सरकार के खजाने पर पड़ने की संभावना है।
एक बार लौटा चुका है वित्त विभाग ..
जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में भी पुलिस मुख्यालय ने स्टेट कंट्रोल रूम के पदों के सृजन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था। वित्त विभाग ने इस पर टिप्पणी करते हुए प्रस्ताव को वापस लौटा दिया। इसके बाद इस साल दोबारा से प्रस्ताव भेजा गया, जो वित्त विभाग में विचाराधीन है।