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83 बार फाइल घुमाकर टाली जिम्मेदारी, हाई मास्ट लाइट सीएमओ दखल के बाद ही हुई ठीक

सरकारी सिस्टम की सुस्ती और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति का ताजा उदाहरण हरमाड़ा क्षेत्र में देखने को मिला, जहां एक हाई मास्ट लाइट को ठीक कराने के लिए फाइल 83 बार इधर से उधर हुई।

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जयपुर

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Ashwani Kumar

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अश्विनी भदौरिया

Mar 31, 2026

जयपुर। सरकारी सिस्टम की सुस्ती और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति का ताजा उदाहरण हरमाड़ा क्षेत्र में देखने को मिला, जहां एक हाई मास्ट लाइट को ठीक कराने के लिए फाइल 83 बार इधर से उधर हुई। इस दौरान 22 बार तो शिकायत जेडीए और निगम के चक्कर लगा गई और बाकी स्वायत्त शासन विभाग से निगम और जेडीए के विद्युत शाखा के बीच घूमी। आखिरकार मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के दखल के बाद 27 फरवरी को लाइट ठीक की जा सकी।
सूत्रों की मानें तो 27 फरवरी को ऊपरी दबाव के चलते जेडीए लाइट को सही कराने के लिए सक्रिय हुआ और तीन घंटे में लाइट को सही कर दिया गया। प्रकरण 27 मार्च को फिर खुला और इस शिकायत को सुलझाने में लापरवाही बरतने वाले जेडीए विद्युत शाखा के एक्सईएन विजय कुमार को कार्यमुक्त कर दिया। ऊपरी आदेश के चलते निगम जेईएन मनीष कुमार को भी एपीओ कर दिया।

ये है मामला
हरमाड़ा स्थित शक्ति नगर कॉलोनी निवासी सुनील ने 17 नवम्बर को राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें लिखा कि बरगद के पास चौराहे की हाई मास्ट लाइट खराब है। शिकायतकर्ता के पास निगम और जेडीए के अधिकारियों के पास फोन पहुंचे। सुनील ने बताया कि सीमा क्षेत्र की बात हर बार पूछी जाती थी। 27 फरवरी को हाईमास्ट लाइट सही हो गई थी।

27 फरवरी को ऊपरी आदेश से जेडीए ने लाइट को सही कराया। बात में सामने आया कि लाइट जेडीसी सीमा क्षेत्र की है। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बीते दिनों समीक्षा बैठक में यह मामला फिर उठा और उसमें जेडीए के एक्सईएन विजय कुमार और निगम के जेईएन मनीष कुमार को एपीओ कर दिया गया।

गलती एक्सईएन की, कार्रवाई जेईएन पर भी
इस मामले में जेडीए एक्सईएन को सीमा क्षेत्र की जानकारी ही नहीं थी। यही वजह रही कि उन्होंने हाईमास्ट लाइट को निगम का बताया। बाद में लाइट शाखा के उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच की और उसमें लाइट जेडीए सीमा क्षेत्र में होना पाया गया। साथ ही लाइट को रातों-रात सही करवाया। इसके बाद भी निगम ने अपने जेईएन को एपीओ कर दिया।

जेडीए के पास कोई तंत्र ही नहीं
नगर निगम ने ट्रीट लाइटों की शिकायतों के निस्तारण के लिए कॉल सेंटर विकसित कर रखा है। जबकि, जेडीए के पास ऐसा कोई सिस्टम तक नहीं है। ऐसे में शहरवासी पहली शिकायत निगम में ही करते हैं। एक्सईएन प्रशांत चाष्टा की मानें तो शिकायतों को सुनने का जेडीए की विद्युत शाखा के पास कोई सिस्टम ही नहीं है। सम्पर्क के माध्यम से या फिर लिखित में जो शिकायतें आती हैं, उनको जेडीए सही करवाता है।

सम्पर्क पोर्टल पर लंबित शिकायतों दिया जोर
निगम अधिकारी परिवादी को कॉल कर लेंगे फीडबैक
जयपुर। सम्पर्क पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों में लापरवाही न हो, इसके लिए निगम अधिकारी परिवादी से सीधे बातचीत कर उनसे फीडबैक लेंगे। सोमवार को निगम मुख्यालय में बैठक के दौरान आयुक्त गौरव सैनी ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए। साथ ही कहा कि समय पर शिकायतों को निस्तारण किया जाए। बेवजह शिकायत को इधर से उधर न किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रतिदिन पोर्टल पर लंबित शिकायतों की मॉनिटरिंग करें और कोई शिकायत यदि क्षेत्राधिकार में नहीं आती है तो फिर संबंधित विभाग से समन्वय कर शीघ्र निस्तारण कराएं।
आयुक्त ने कहा कि रेंडमली परिवादियों को भी कॉल करें और समस्या के निस्तारण के संबंध में भी फीडबैक लें।

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