लगभग 6 वर्षों में शहर के प्रमुख विश्राम घाट भदभदा, सुभाष नगर, छोला, कोलार और बैरागढ़ में लगभग एक लाख शवों का दाह संस्कार गो काष्ठ से किया जा चुका है। भोपाल शहर के 5 प्रमुख विश्राम घाटों में एक वर्ष में लगभग 15 हजार दाह संस्कार गोकाष्ठ से हो रहे हैं। गोकाष्ठ की 3 फीसदी, जबकि लकड़ी की करीब 34 फीसदी राख वायुमंडल में जाती है और ओजोन परत को डैमेज करती है। उन्होंने बताया कि समिति की टीम मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों के साथ ही दिल्ली, बनारस व मुंबई सहित देश के अन्य शहरों व महानगरों में गोकाष्ठ को लेकर जनमानस को जागरूक कर रही है।