
Result of civil services exam 2020 released- गौरव बुडानिया ने पहले प्रयास में प्राप्त की सफलता, मेरिट में पाया 13वां स्थान
जयपुर के दिव्यांशु 30वें स्थान पर, दूसरे प्रयास में हासिल की सफलता
आईएस टीना डाबी की बहन रिया डाबी भी बनीं आईएएस,मेरिट में 15वें स्थान पर रही रिया
जयपुर
सिविल सेवा परीक्षा-2020 का अंतिम परिणाम शुक्रवार को जारी हो गया है। आरएएस 2018 में 12वें स्थान पर रहे गौरव बुडानिया ने भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में 13वां स्थान प्राप्त किया है। आईएएस अधिकारी टीना डाबी की छोटी बहन रिया डाबी भी इसमें चयनित हुई है। उनकी 15वीं रैंक आई है। उनके साथ ही 30वें स्थान पर जयपुर में मालवीय नगर निवासी दिव्यांशु चौधरी रहे हैं।
सफलता का शॉर्ट कट नहीं: गौरव
रैंक : 13
वहीं मूल रूप से चूरू निवासी गौरव बुडानिया ने सिविल सर्विस परीक्षा में 13वां स्थान प्राप्त किया है। गौरव इससे पहले आरएएस परीक्षा 2018 में भी 12वीं रैंक हासिल कर चुके हैं। जयपुर में रहकर सिविल सर्विस की तैयारी में जुटे गौरव शिक्षक पिता रामप्रसाद बुडानिया की संतान हैं वहीं उनकी मातासंतोष गृहणी हैं। अपनी सफलता के टिप्स शेयर करते हुए गौरव कहते हैं कि प्रतिदिन 6 से आठ घंटे तक पढ़ाई की। बार बार रिविजन पर फोकस किया। आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई कर चुके गौरव कहते हैं कि कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि टॉप 50 में मेरा नाम आएगा। अपनी खुशी का इजहार करते हुए उन्होंने कहा कि जब दोस्तों और अभिज्ञान कोचिंग के मेरे गुरु रघुवीर जी ने मेरी रैंक बताई तो एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ। कुछ समय तो समझने में ही लग गया कि मेरी 13वीं रैंक हैं। अन्य प्रतिभागियों को सफलता का टिप्स देते हुए उनका कहना है कि सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता।
2016 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहला स्थान प्राप्त कर चुकी टीना डाबी ने अपनी बहन की सफलता पर सोशल मीडियापरएक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने लिखा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मेरी छोटी बहन रिया डाबी ने यूपीएससी 2020 परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की है।
सफलता के लिए लक्ष्य तय करना जरूरी: दिव्यांशु
रैंक : 30
दिव्यांशु ने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है। बिट्स पिलानी से बीटेक और आईआईएम कोलकाता से एमबीए कर चुके दिव्यांशु अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता, दोस्तों और गुरुजनों को देते हैं। एक साल एक बैंक में जॉब करने के बाद सिविल सर्विस की तैयारी में जुटे दिव्यांशु का कहना है कि आमतौर पर उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए छह से सात घंटे का समय दिया लेकिन जैसे जैसे परीक्षा का समय पास आता गया उन्होंने तकरीबन 12 घंटे तक पढ़ाई की। दिव्यांशु के पिता डॉ. प्रभु दयाल राजकीय महाविद्यालय दौसा और माता डॉ. संतोष गढ़वाल राजकीय महिला महाविद्यालय दौसा में बतौर प्रिंसिपल कार्यरत हैं। सिविल सर्विस सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यार्थियों को दिव्यांशु का कहना है कि यदि लक्ष्य बनाकर कड़ी मेहनत के साथ तैयारी की जाए तो सफलता मिलनी ही है।
लक्ष्य तय करना जरूरी
रैंक : 65
प्रणव विजयवर्गीय को पहले ही प्रयास में यह सफलता मिली है। मुंबई में आईआईटी से बीटेक करने के बाद हरियाणा जॉब की लेकिन कुछ समय ही उसे छोड़ दिया। प्रणव कहते हैं कि पिछले डेढ़ साल से तैयारी कर रहा था। अभी सफलता मिली है। अपनी सफलता को लेकर उनका कहना है कि पहले लक्ष्य तय करें फिर उसे पूरा करने में जुट जाएं।
Published on:
25 Sept 2021 12:36 am
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