19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुर

RTH Bill : हे भगवान…हठ छोड़ो, मरीज हो रहे परेशान

राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल (Rajasthan Right To Health Bill) के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों के टीचर्स भी निजी चिकित्सकों के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आए हैं। इनमें सीनियर प्रोफेसरए प्रोफेसरए असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर शामिल है।

Google source verification

जयपुर. राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल (Rajasthan Right To Health Bill) के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों के टीचर्स भी निजी चिकित्सकों के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आए हैं। इनमें सीनियर प्रोफेसरए प्रोफेसरए असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर शामिल है। उन्होंने बुधवार को ओपीडी कार्य का संपूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। जिससे सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों को इलाज के लिए भटकना तय है। दूसरी ओरए अस्पताल प्रशासन का दावा है किए मरीजों को दिक्कत नहीं होने देंगे। आइसीयू और इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से सुचारू रहेगी। बताया जा रहा है कि कार्य बहिष्कार में प्रदेश के १५ हजार से ज्यादा चिकित्सक शामिल होंगे। सबसे ज्यादा दिक्कते ग्रामीण इलाकों में होगी।

जनता को राहत दे सरकार…
-अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिस्दा) के अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने बताया कि संघ से जुड़े समस्त सेवारत चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। आगे की रणनीति बुधवार को ही तय होगी। सरकार इस मामले में गंभीरता बरते ताकि जनता परेशान नहीं हों।

15 हजार से ज्यादा डॉक्टर रहेंगे हड़ताल पर
-इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) (Indian Medical Association Rajasthan) राजस्थान उदयपुर के अध्यक्ष डॉ आनंद गुप्ता ने बताया कि कार्य बहिष्कार लगातार जारी है। सरकारी डॉक्टर भी साथ आ गए है, जबकि रेजिडेंट पहले से साथ ही। बुधवार को 15 हजार से ज्यादा डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे।

इमरजेंसी सेवाएं नहीं होगी प्रभावित

-इस संबंध में राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (Rajasthan Medical College Teachers Association) के अध्यक्ष डॉ धनंजय अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार को सुबह साढ़े नौ बजेे एसएमएस अस्पताल में अधीक्षक कार्यालय के बाहर सामूहिक बैठक हुई। जिसमें बुधवार को संपूर्ण ओपीडी सेवाओं के कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। हालांकि इमरजेंसी व आइसीयू सेवाएं यथावत रहेगी।

चिकित्सा मंत्री धमका रहे, मुख्यमंत्री दिखाएं बड़ा दिल

-प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स सोसायटी की ओर से जारी बयान जारी कर चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा पर धमकाने का आरोप लगाया है। बयान के अनुसार चिकित्सा मंत्री मीडिया के माध्यम से आंदोलन कारियों को धमका रहे हैं। डॉक्टरों के लिए उन्होंने कसाई शब्द का भी इस्तेमाल किया। ये ठीक नहीं है। आंदोलन उग्र हो रहा है। मुख्यमंत्री (CM Ashok Gehlot) को बड़ा दिल दिखाएंए इस असंवैधानिक कानून को वापस लें और जनता को राहत दे। उनका कहना है कि वे वार्ता के लिए तैयार है।

किसी भी सूरत में बिल लागू नहीं

-इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) राजस्थान के अध्यक्ष डॉ सुनील चुघ का कहना है कि किसी भी सूरत में बिल मंजूर नहीं है। सरकार को इसे वापस लेना नहीं होगा। चिकित्सकों ने मंगलवार को सुबह एसएमएस अस्पताल के जेएमए परिसर से जवाहर सर्कल तक साइकिल रैली निकालकर विरोध जताया।

चिकित्सा मंत्री बोले, खुले है सरकार के दरवाजे, वापस नहीं होगा कानून

चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि सरकार के दरवाजे खुले हैं। बिल का विरोध करने का किसी का अधिकार नहीं है। यह जनता का बिल है। सरकार इसको किसी भी कीमत पर वापस नहीं लेगी। इसे जनता के लिए लागू करके रहेंगे। इससे मानना होगा। सरकार चिकित्सकों से बात करने को तैयार है। दरवाजे खुले है। आकर बताएं। कोई कमी रह गई हो तोए उसमें सुधार कर लेंगे।