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आरयूएचएस में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से मरीजों की मौत सरकार के माथे पर कलंक

प्रदेश के सबसे बड़े कोविड केयर सेंटर में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से मरीजों का मामला गर्माता जा रहा है। मामले को लेकर भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा है। इन मौतों पर सरकार के माथे पर कलंक बताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग उठ रही है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

May 15, 2021

आरयूएचएस में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से मरीजों की मौत सरकार के माथे पर कलंक

आरयूएचएस में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से मरीजों की मौत सरकार के माथे पर कलंक

जयपुर।

प्रदेश के सबसे बड़े कोविड केयर सेंटर में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से मरीजों का मामला गर्माता जा रहा है। मामले को लेकर भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा है। इन मौतों पर सरकार के माथे पर कलंक बताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग उठ रही है।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल आरयूएचएस में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने से 3 मरीजों की मृत्यु होना सरकार के माथे पर कलंक है। प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि इस घटना की जानकारी मिलते ही चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं करके पूरे मामले को दबाया गया। राठौड़ ने मांग की है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा घटना की निष्पक्ष जांच करवाकर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो।

जिम्मेदारों पर दर्ज हो हत्या का केस- सराफ

विधायक कालीचरण सराफ ने महामारी के दौर में लचर सिस्टम के कारण हो रही मरीजों की मौत को हत्या करार दिया है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि लोंगों की जान के दुश्मन बने ऐसे कालाबाजारियों तथा जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। सराफ ने कहा कि आरयूएचएस में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से तीन मरीजों की मौत हो गई। चिकित्सकों ने तीनों मरीजों की हालत क्रिटिकल बताकर मृत घोषित करके आगे की कार्रवाई शुरू कर दी, लेकिन हकीकत यह है कि ऑक्सीजन टैंकर चालक की जल्दबाजी एवं प्लांट इंचार्ज की लापरवाही से सप्लाई बाधित हुई थी, जिसके चलते मरीजों की जान गई। राज्य सरकार कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति के लिए सामान्य मामला दर्ज कर रही है जिसमें कुछ महीनों की सजा होगी।