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अगर गहलोत का गुजरात में चला जादू तो पायलट का सपना रह जाएगा अधूरा

राजस्थान का पायलट बनने के लिए गहलोत और सचिन की अग्नि परिक्षा, गुजरात और हिमाचल के चुनावी परिणाम तय करेंगे ,कौन होगा राजस्थान के ताज का हकदार, राह कठिन है लेकिन चुनावी दावेदारी की असल अखाड़ा तो कांग्रेस ने इनके लिए पहले से तैयार कर दिया है.सचिन पायलट को हिमाचल प्रदेश का पर्यवेक्षक बनाया गया है और अशोक गहलोत तो गुजरात की चुनावी कमान सौंपी गई, कांग्रेस आलाकमान ने सीएम अशोक गहलोत को गुजरात विधानभा चुनाव में वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

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अगर गहलोत का गुजरात में चला जादू तो पायलट का सपना रह जाएगा अधूरा

अगर गहलोत का गुजरात में चला जादू तो पायलट का सपना रह जाएगा अधूरा

राजस्थान का पायलट बनने के लिए गहलोत और सचिन की अग्नि परिक्षा, गुजरात और हिमाचल के चुनावी परिणाम तय करेंगे । कौन होगा राजस्थान के ताज का हकदार, राह कठिन है लेकिन चुनावी दावेदारी की असल अखाड़ा तो कांग्रेस ने इनके लिए पहले से तैयार कर दिया है.

सचिन पायलट को हिमाचल प्रदेश का पर्यवेक्षक बनाया गया है और अशोक गहलोत को गुजरात की चुनावी कमान सौंपी गई है कांग्रेस आलाकमान ने सीएम अशोक गहलोत को गुजरात विधानभा चुनाव में वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। गहलोत 2017 में गुजरात के प्रदेश प्रभारी बनाए गए थे। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले गहलोत की बड़ी चुनौती गुजरात विधानसभा 2022 में कांग्रेस को जीत दिलाने की है। गुजरात में बीजेपी 1995 से शासन कर रही है। सीएम गहलोत ने पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी-अमित शाह को घेरने के लिए रणनीति बनाई थी और काफी हद तक उसमें सफल भी हुए थे। गहलोत की रणनीति से गुजरात में कांग्रेस का सूखा अगर खत्म हो जाता है तो निश्चित तौर पर सीएम गहलोत का राजस्थान में जलवा रहेगा।

पार्टी आलाकमान ने सचिन पायलट को हिमाचल प्रदेश का पर्यवेक्षक बनाकर साफ संकेत दिया है कि राजस्थान में कांग्रेस की कमान संभालने से पहले उन्हें हिमाचल प्रदेश में पार्टी को जीत दिलानी होगी। हिमाचल में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है। जयराम सरकार को घेरने के लिए सचिन पायलट राजनीतिक बिसात बिछाएगें। हिमाचल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य है ऐसे में कांग्रेस हिमाचल जीतकर मोदी और शाह को सियासी संदेश देना चाहती है। सचिन पायलट को यहां पंजाब वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा के साथ भी मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की वापसी हो जाती है तो सचिन पायलट का सियासी कद बढ़ेगा

कांग्रेस के खेवनहार बन सकते है अशोक गहलोत

दिल्ली में कांग्रेस की परेशानी अलग है। राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ रहे है या फिर पार्टी से दूरी बना रहे है, ऐसे में पार्टी राजस्थान में अशोक गहलोत को नाराज नहीं करना चाहेगी । इसलिए बीच का रास्ता निकाला गया है गहलोत का गुजरात में बीजेपी के चाणक्य अमित शाह से सीधे चुनावी मुकाबला होगा और गहलोत का जादू अगर गुजरात में चल गया तो सचिन पायलट के राजस्थान फतेह करने के सपने पर ग्रहण लग सकता है लेकिन बात इतनी भी आसान नहीं है, साल 1995 से गुजरात में बीजेपी का राज है और उसे उखाड़ फेंकना गहलोत के लिए आसान नही होगा और पार्टी में आंतरिक कलह उनके जादू को फीका भी कर सकती है

पायलट के पक्ष में कई फैक्टर्स

सीएम अशोक गहलोत सचिन पायलट की वापसी नहीं चाहते थे। उन्होंने पायलट की वापसी रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सचिन पायलट की जरूरत कांग्रेस को सिर्फ राजस्थान में नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी है। राजस्थान के अलावा हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गुर्जर वोट बैंक कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में रहते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में गुर्जर-बहुल सीटों पर सीधा नुकसान होने का खतरा है, पायलट की राजस्थान ही नहीं, अन्य राज्यों में गुर्जर समाज पर पकड़ है। 2022 में यूपी में हुए विधानसभा चुनाव में प्रियंका और पायलट की चुनावी जुगलबंदी सभी ने देखी है। ऐसा भी कहा जाता है पायलट के साथ कांग्रेस के यंग ब्रिगेड के नेता मिलिंद देवड़ा, दीपेंद्र हुड्डा और भंवर जितेंद्र सिंह हैं जो उनका साथ दे रहे है

गहलोत और पायलट की तनातनी का नतीजा राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव 2022 दिख चुका है जहां NSUI की करारी हार में सामना करना पड़ा और अगर इन दोनों के बीच ये तल्खी जारी रही तो ना सिर्फ पार्टी को आने विधानसभा चुनाव में नुकसान होगा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ये कांग्रेस के लिए ये विवाद बड़ा सेटबैक बन सकता है