
अस्पताल की आड़ में दुकानों से सालाना 7 करोड़ रूपये का किराया वसूल रहा है संतोकबा दुर्लभजी
जयपुर. जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के ठीक पीछे रियायती जमीन पर बने संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल में किराए के नाम पर करीब 7 करोड़ रुपए सालाना कमाई करने का मामला सामने आया है। अस्पताल की जमीन पर दुकानें तो बनाई ही गईं, अस्पताल की जरूरतों के नाम पर अवैध निर्माण कर लिया गया है। नियमन की अर्जी आने का बहाना बनाकर जेडीए इसे हटाने से कन्नी काट रहा है। इस अस्पताल को 22 दुकानों के किराए से सालाना मोटी रकम मिल रही है। करीब २ करोड़ रुपए अमानत राशि भी ली हुई है, जिस पर लगातार ब्याज मिल रहा है। जेडीए ने हाल ही एक मामले में लोकायुक्त कार्यालय को यह जानकारी दी है।
पत्रिका की खबर पर लिया था प्रसंज्ञान
लोकायुक्त ने मार्च 2014 में राजस्थान पत्रिका में 'पांच निजी अस्पतालों की जांच' शीर्षक से प्रकाशित खबर के आधार पर प्रसंज्ञान लिया था। भगवान महावीर कैंसर अस्पताल व संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल की भी जांच की गई थी। पत्रिका की खबर के आधार पर लोकायुक्त ने जेडीए से अस्पतालों की गतिविधियों की जानकारी मांगी। इस पर खुलासा हुआ कि संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल परिसर में आवंटन शर्तों की अवहेलना, अवैध निर्माण व किराए से मोटी कमाई होने के बावजूद जेडीए मौन साधे हुए है।
फंस गए जेडीसी
लोकायुक्त के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने पर जेडीसी वैभव गालरिया फंस गए हैं। सूत्रों के अनुसार लोकायुक्त ने जेडीसी के खिलाफ जांच शुरू कर आरोप पत्र दिया है।
नि:शुल्क लीज पर ली जमीन
दुर्लभजी अस्पताल को जेडीए ने 6 पट्टे 99 साल की लीज पर नि:शुल्क दिए थे। लीज शर्तों के अनुसार भू स्वामित्व जेडीए के पास रहना था लेकिन अस्पताल ने उसे अपने नाम करा लिया।
किराए के उछाल से मालामाल
- तारा मेडिकोज : सालाना किराया क्र२.४० करोड़ रुपए
- ओके डायग्नोस्टिक रिसर्च सेंटर : 10 साल पहले 24 लाख और अब क्र९६ लाख रुपए सालाना किराया, अमानत राशि एक करोड़ रुपए
- वर्धमान इमेजिंग सेंटर : 1998 में रुपए 4.55 लाख, 2016-17 में 18 लाख और 2017-18 में 27 लाख रुपए सालाना किराया
- वर्धमान मेडिकोज : 1996 में रूपये 36 हजार, 2016-17 में 36 लाख और 2017-18 में 54 लाख रुपए सालाना किराया, अमानत राशि 35 लाख रुपए
- कैंटीन किराया : रूपये 51.74 लाख रुपए सालाना, 12 लाख रुपए अमानत राशि
- 9 दुकानों का कैंटीन किराया : 1.80 करोड़ सालाना और 32.25 लाख अमानत राशि
लोकायुक्त का अन्वेषण, फिर भी निर्माण यथावत
ब्लड बैंक भवन में छठवीं मंजिल, अवेदना आश्रम भवन में सेटबैक में निर्माण और एक मंजिल अधिक बनाने, पार्किंग में डेढ़ मंजिल, यूटिलिटी शॉप भवन में 5 की जगह 6 दुकानें व उस पर पक्का निर्माण, प्रशासनिक भवन में नक्शे के विपरीत निर्माण और २ जगह टिनशेड डालने को जेडीए खुद अवैध बता रहा है। मगर निर्माण नियमित करने के आवेदन की आड़ में कार्रवाई से बच रहा है।
जेडीसी वैभव गालरिया, ने कहा की अस्पताल प्रशासन ने कई अवैध निर्माण हटा लिए हैं। कुछ मामलों में नियमित करने के लिए आवेदन किया है। मामला भवन मानचित्र समिति में ले जा रहे हैं। इसमें तय होगा कि पेनल्टी लेकर नियमित किया जा सकता है या नहीं। कॉमर्शियल गतिविधि के मामले में सरकार से मार्गदर्शन मांगा है।
संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल के मुख्य प्रशासक जार्ज थॉमस ने कहा की किराया लेने में पारदर्शिता है। टैक्स दिया जा रहा है। निर्माण 20 साल पुराना है। जेडीए ने २ बार नोटिस दिया, कुछ निर्माण हटा लिया। अवेदना आश्रम की छत पर तो पानी का टैंक बनाया है। ब्लड बैंक भवन की छत पर निर्माण भवानी सिंह मार्ग चौड़ा करने को दी गई 20 फीट जमीन के बदले एफएआर बढ़ाने की छूट के तहत किया जा रहा है।
Published on:
21 Jun 2018 10:54 am
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