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…कौन है Indian Army का वह जंगबाज,दी थी china-Pakistan को मात

सैन्य कौशल की बदौलत भारतीय सामरिक इतिहास के अप्रतिम योद्धा सगतसिंह की इस साल जन्म शताब्दी है...राजस्थान के इस सपूत ने सामरिक रणनीति की नई परिभाषा गढ़ी...पड़ोसियों का भूगोल बदला...लेकिन बदकिस्मती कहें या कुछ और...वीरता की कहानियों के महानायक को सेवाकाल में एक अदद वीरता पुरस्कार तक नहीं मिल सका...अब इसी वीर को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिलाने की उम्मीद बंधाई जा रही है...

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ये गौरव गाथा है राजस्थान के सपूत लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह की...चूरू जिले के कुसुमदेसर गांव में जन्मे...बीकानेर के गंगा रिसाला से भारतीय फौज में भर्ती हुए और लेफ्टिनेंट जनरल जैसे प्रतिष्ठित पद पर पहुंचते पहुंचते सामरिक इतिहास को इतनी उपलब्धियों से भर दिया कि न सिर्फ उनकी तुलना अमरीकी जनरल पैटन से होती है...बल्कि दुनिया के प्रमुख देश जनरल सगत के युद्ध कौशल को अपने सैन्य पाठ्यक्रमों में पढ़ाते हैं...लेकिन अफसोस है कि भारतीय फौज के इस जाबांज को अपने सेवाकाल में एक अदद वीरता पुरस्कार तक नसीब न हो सका...पदोन्नति और उनके सेनाध्यक्ष पद तक पहुंचने की बात भी करना बेमानी होगी....
इस साल जनरल सगत का जन्म शताब्दी वर्ष है...पहली बार उन्हें न सिर्फ राजस्थान बल्कि सेना मुख्यालय और देश के अन्य हिस्सों में याद किया जाएगा...जन्म शताब्दी समारोह होंगे...जयपुर स्थित थल सेना की सप्त शक्ति कमान से बुधवार को कर्टन रेजर इवेंट के साथ इसकी शुरुआत भी हो गई...14 जुलाई को उनके जन्म दिन पर बड़ा कार्यक्रम होगा...लेकिन उन्हें जानने वाले, सेना के सेवानिवृत्त और सेवारत अधिकारी और जनरल सगत के परिजन तक इस बात से अचम्भित है कि जिस फौजी अफसर का कैरियर वीरता की गौरव गाथाओं से भरा हो...उसे वीर चक्र सरीखा तमगा भी क्यों नहीं मिल सका....
जनरल सगतसिंह को हालांकि देश के तीसरे बड़े नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाजा गया...लेकिन सैन्य तमगों के नाम पर उनके साथ सिर्फ परम विशिष्ट सेवा मेडल ही जुड़ सका...जिस जनरल ने गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त करवाया हो...जिसने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का नक्शा बदल दिया है...जिसने चीन से 1962 की लड़ाई का बदला लेते हुए पांच साल बाद ही जानमाल का बड़ा नुकसान पहुंचाकर नाथूला दर्रे को सुरक्षित किया हो...उस फौजी अफसर को एक भी वीरता पुरस्कार नहीं? ....य़ह सवाल सामने आते ही सेना के अफसर भी सकते में आ जाते हैं...सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कारण क्य़ा रहे, नहीं मालूम...इतने वर्ष बाद अब किसी वीरता पुरस्कार का प्रावधान भी नहीं है...लेकिन उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न तो दिया ही जा सकता है...सेना भी इसे दिशा में प्रयास करेगी...
भारतीय सेना ने चूंकि जनरल सगतसिंह को जनशताब्दी वर्ष में याद करने का फैसला किया है तो परिजनों को कुछ उम्मीद बंधी है...जनरल सगत के पुत्र रिटार्यड कर्नल रणविजय सिंह कहते हैं कि जनरल सगतसिंह को भारत रत्न देने की सिफारिश की जा रही है...कुछ बड़े अफसरों ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है...
आइए अब आपको रू-ब-रू करवाते हैं जनरल सगतसिंह की वीरता के किस्सों से...आपको वो दृश्य तो याद होगा जब बांग्लादेश बना...1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी जनरल नियाजी ने 93 हजार युद्धबंदियों के साथ भारतीय सेना के साथ समर्पण कर दिया...{Picture Loop} उस वक्त की तस्वीर में जनरल जगजीत अरोड़ा के साथ समर्पण कर रहे नियाजी के पीछे बांयी ओर खड़ा जो लम्बा सा सैन्य अफसर दिख रहा है वो जनरल सगत सिंह ही है...जनरल सगत बांग्लादेश के निर्माण के नीति निर्माता थे...सेना की चौथी कोर के मुखिया जनरल सगत ने उन दिनों में भारतीय फौज के पहले हेलीबोर्न ऑपरेशन को अंजाम दिया था, जब सेना तकनीक के मामले में तंग थी...सगत ने मुंह फाड़ती मेघना नदी पर एयरब्रिज बना दिया...समय से पहले हमारे सैनिक ढाका पहुंच गए...जनरल सगत को सैनिक वापस बुलाने के लिए कहा गया...लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और इसके साथ ही बदल गया पाकिस्तान का भूगोल...
इसी तरह चीन को भी जनरल सगत का सबक अच्छी तरह याद है...सिक्किम की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे चीन को 1967 में बाड़ बांध रहे जनरल सगत के सैनिकों पर गोली चलाना भारी पड़ गया...सैन्य अधिकारी बताते हैं कि चीन के साथ सीमा का डिमार्केशन नहीं था...इसकी तैयारी के दौरान चीन ने फायरिंग की तो सगत ने ऐसा जवाब दिया कि चीन को कम से कम 300 सैनिक गंवाने पड़े...उसे सैन्य साजो सामान का नुकसान भी काफी उठाना पड़ा...इसका असर ये हुआ कि भारतीय सैनिकों का मनोबल आज भी चीन से कभी खौफ नहीं खाता...जनरल सगत ने ही छाताधारी सैनिक भेजकर गोवा को पुर्तगाल से आजाद करवाया था...पुर्तगाली भाग छूटे...लेकिन पुर्तगाल में उन पर उस जमाने में 10 हजार डॉलर का ईनाम...और भी कई किस्से हैं सगत की दिलेरी के जो उन्हें एक महान सैन्य कमांडर बनाते हैं...
देर से ही सही सेना उनको याद कर रही है...जयपुर में उनकी प्रतिमा लगाई जा रही है...जन्मशती से एक दिन पहले इसका अनावरण होगा...गोवा, दिल्ली, राज्य के विभिन्न इलाकों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे...सेना की इस पहल से जनरल सगत के जयपुर में रह रहे परिजन गर्व महसूस कर रहे हैं, लेकिन वीरता पुरस्कार न मिल पाने का गम उन्हें भी साल रहा है...सेना ने उम्मीद बंधाई है...देखते है किसी भी दल को अपने नाम से ही सत्ता दिलाने का दमखम रखने वाली सेना के इस सुपर वार हीरो को कब असली सम्मान मिलता है...जयपुर से आनंद मणि त्रिपाठी के साथ सुरेश व्यास की रिपोर्ट

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