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फ्लायर: आत्मकल्याण के लिए धर्मश्रवण, चिंतन और आचरण आवश्यक : श्रुतमुनि

जयपुर

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Newsdesk

Aug 12, 2026

Rajasthan

मईलापुर.
श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानकवासी जैन संघ, मईलापुर में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत गुरुदेव श्रुतमुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। यह जीवन केवल शरीर, धन, परिवार और सांसारिक सुख-सुविधाओं के लिए नहीं बल्कि आत्मकल्याण एवं मोक्षमार्ग की साधना के लिए प्राप्त हुआ है। मनुष्य संसार की अनेक आवश्यकताओं और चिंताओं को लेकर सजग रहता है, लेकिन उसे यह भी विचार करना चाहिए कि वह अपनी आत्मा के कल्याण के लिए प्रतिदिन कितना समय देता है। आत्मचिंतन ही जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। धर्म केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्ग है। धर्मसभा में सुनी गई वाणी पर चिंतन और मनन होना चाहिए तथा उसके अनुसार हमारे विचार, वाणी और व्यवहार में परिवर्तन आना चाहिए। धर्मश्रवण का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह राग-द्वेष, क्रोध और अशुभ भावों को कम कर आत्मा को शुद्धता की ओर ले जाए। जीवन में कोई भी बड़ा परिवर्तन अचानक नहीं आता। छोटे-छोटे संकल्प, नियमित साधना, धैर्य और निरंतर पुरुषार्थ से व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है। सामायिक, स्वाध्याय, तप, दर्शन, वंदन, अनुमोदना एवं धर्मश्रवण जैसी आराधनाओं को नियमित जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। धर्म के गुण केवल चर्चा में नहीं, बल्कि हमारे आचरण में दिखाई देने चाहिए। बड़ों के प्रति विनय, प्रत्येक जीव के प्रति दया, मन एवं इंद्रियों पर संयम तथा विचार-वाणी-व्यवहार की शुद्धता ही सच्चे धर्म की पहचान है। तपस्वियों की साधना दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनती है। किसी की तपस्या देखकर यदि हमारे भीतर भी धर्म, तप और संयम की भावना जागृत होती है, तो वह अनुमोदना भी आत्मकल्याण का माध्यम बन जाती है। इस अवसर पर एस.एस. जैन संघ, टी. नगर के अध्यक्ष उत्तमचंद गोठी एवं महेंद्र सेठिया तथा वडपलनी श्री जैन संघ के अध्यक्ष देवीचंद बरलोटा, महावीर तालेड़ा, वईसराज रांका, सुरेश कोठारी एवं अशोक बोहरा ने धर्मसभा में उपस्थित होकर शोभा बढ़ाई। यह जानकारी मंत्री विमलचंद खाबिया ने दी।