
Single Use Plastic Ban: संत-महंतों की अपील, सिंगल यूज प्लास्टिक पवित्र नहीं, इनका बहिष्कार करें
जयपुर। सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन न केवल पर्यावरण व जानवरों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि यह पवित्र भी नहीं है। इसे लेकर प्रमुख संत—महंतों से बातचीत की गई तो सब सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन उपयोग के खिलाफ नजर आए। इन संत—महंतों ने मंदिरों व तीर्थ स्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग पर पाबंदी की बात कही है, साथ ही लोगों भी अपील की है कि वे खुद भी प्लास्टिक का बहिष्कार करें और स्वस्थ्य जीवन जीएं।
गंभीरता से चिंतन करें लोग, यह पवित्र नहीं
उत्तर भारत की प्रमुख पीठ गलता तीर्थ के पीठाधीश्वर अवधेशाचार्य का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग के दुष्परिणाम कई तरीकों से सामने आए है, इसलिए सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाया, लेकिन व्यावहारिक रूप से इस पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है। लोगों को इस पर गंभीरता से चिंतन करना चाहिए और इसका उपयोग बंद करें। यदि आवश्यक भी है तो 100 माइक्रोन से उपर के प्लास्टिक का सीमित उपयोग ही करें। यह पर्यावरण और जीव—जंतुओं के लिए सुरक्षित नहीं है। प्लास्टिक से पहले भी कई विकल्प थे, उस ओर फिर बढ़ना पड़ेगा, वैसे भी प्लास्टिक व पॉलीथिन पवित्र नहीं है।
पॉलीथिन में प्रसाद हो जाता हैं दूषित
मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर के महंत कैलाश शर्मा का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक व पॉलीथिन पर्यावरण के साथ मनुष्य और जानवरों के लिए बहुत हानिकारक है। पॉलीथिन में हम प्रसाद हो या खाने की चीजे डाल देते हैं, वह दूषित हो जाती है। 7 साल पहले मंदिर ट्रस्ट की अेार से पॉलीथिन पर पाबंदी लगाई गई, उसके अच्छे परिणाम सामने आए। सरकार ने भी पाबंदी लगा रखी है, फिर भी यह उपयोग में लाए जा रहे है। इसका उपयोग बंद करें और स्वास्थ लाभ लें। गाय को गौमाता का दर्जा दिया गया है। उसके स्वास्थ्य की भी चिंता करें।
पॉलीथिन का नहीं करें उपयोग, जीवन रहे सात्विक
शुक सम्प्रदायाचार्य अलबेली माधुरी शरण का कहना है कि हमारा जीवन सा त्विक रहे। पर्यावरण को लेकर हमें ध्यान रखना हेागा। घर के कचरे केा पॉलीथिन में घर से बाहर नहीं निकाले, डस्टबीन में उसे रखें और कचरे की गाड़ी में ही डाले। सरस परिकर के सभी भक्तों से आग्रह है कि वे परिकर में प्लास्टिक और पॉलीथिन में कोई भी सामग्री लेकर नहीं आए। पॉलीथिन को पवित्र नहीं माना गया है। इसका हम लोगों केा बहिष्कार करना चाहिए।
लोक व जीव कल्याण के लिए प्लास्टिक पर लगे रोक
हाथोज धाम के बालमुकुंदाचार्य का कहना है कि लोक कल्याण व जीव कल्याण के लिए पॉलीथिन व सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगनी चाहिए। प्लास्टिक का कचरा पर्यावरण व गौमाता के लिए हानिकारक है, जमीन को भी खराब कर रहा है, दुख का विषय है कि इसके बाद भी हम इसका उपयोग कर रहे है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए भी हानिकारक है। सभी सनातनियों व वैष्णव जनों से अपील है कि प्लास्टिक का उपयोग बंद करें, पॉलीथिन को बाहर फेंकना बंद करें। सरकार इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।
प्लास्टिक से हमारा जीवन सुरक्षित नहीं
घाट के बालाजी के सुदशर्नाचार्य का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक व पॉलीथिन का उपयोग उचित नहीं है। यह हम सब के लिए हानिकारक है। कई शोध आए है, इससे हमारा जीवन सुरक्षित नहीं है। पॉलीथिन का उपयोग बंद होना चाहिए। जनता जागरूक हो और हमारा दायित्व बनता है कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तहर पाबंदी लगाए।
पॉलीथिन हमेशा नुकसानदायक
अमरापुरा दरबार के संत मोनूराम का कहना है कि पॉलीथिन हमेशा नुकसानदायक है, यह जानते हुए भी लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। सरकार की ओर से अभियान भी चलाया गया, लेकिन हम जागरूक नहीं हो रहे हैं। इसका नुकसान हमें ही भरना होगा। हम घर का कचरा व सब्जियां भी पॉलीथिन में भरकर बाहर डाल देते है, जिसे गौमाता खाकर बीमार हो जाती है। हमें खुद को जागरूक होना होगा और पॉलीथिन का बहिष्कार घर से ही करना हेागा। इसकी जगह कपड़े के थैले का उपयोग करना होगा।
देखें वीडियो :
Published on:
21 Mar 2023 11:40 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
