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जवाबदेही कानून की मांग को लेकर सामाजिक संगठनों का धरना शुरू, 15 मार्च तक चलेगा आंदोलन

-शहीद स्मारक पर शाम 4 बजे सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय के नेतृत्व में शुरू हुआ धरना,सरकार पर लगाया वादाखिलाफी करने का आरोप,कांग्रेस अपने चुनाव घोषणा पत्र में किया था जवाबदेही कानून लागू करने का वादा

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accountability law

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जयपुर। प्रदेश में जवाबदेही कानून लागू करने को लेकर सामाजिक संगठनों के दबाव के बावजूद सरकार जवाबदेही कानून के मसौदे को अमलीजामा पहनाने से परहेज कर रही है, जिस पर अब सामाजिक संगठनों ने सरकार से आरपार की लड़ाई का बिगुल बजाते हुए आंदोलन शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में आज सामाजिक संगठनों की ओर से शहीद स्मारक पर जवाबदेही कानून की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया है।

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय के नेतृत्व में शाम 4 बजे शहीद स्मारक पर हुए अनिश्चितकालीन धरने में कई संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। सामाजिक संगठनों से जुड़े नेताओं का कहना है कि जवाबदेही कानून को लेकर प्रदेश में पिछले 10 साल से मांग चल रही है, कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र और बीते विधानसभा के बजट सत्र में भी जवाबदेही कानून लागू करने की घोषणा की थी लेकिन अभी तक इस कानून को प्रदेश में लागू नहीं किया जा रहा है।


सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने अक्टूबर 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान अपने चुनावी घोषणा पत्र में जवाबदेही कानून लागू करने का वादा किया था और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2019 में अपने बजट भाषण में जवाब दें कानून पारित करने की घोषणा की थी लेकिन आज तक इस घोषणा पर अमल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जवाब देही कानून को लेकर लंबे समय तक आंदोलन चले हैं। 1 दिसंबर 2015 से 10 मार्च 2016 तक राजस्थान में जवाबदेही यात्रा निकाली गई थी।

2016 में राजस्थान में जवाबदेही कानून पारित करने को लेकर जयपुर में 22 दिनों तक धरना दिया गया था। 2017-18 में भी जवाब देंही कानून को लेकर धरने दिए गए थे और 20 दिसंबर 2021 को भी दूसरी जवाब दे यात्रा शुरू की गई थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इसे टाल दिया गया था, लेकिन अब हमारी मांग है कि सरकार को विधानसभा में जवाब देही कानून लागू करने की घोषणा करनी चाहिए और अपने पूर्व में की घोषणा पर अमल करते हुए इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए।

उन्होंने कहा कि 15 मार्च तक हमारा धरना जारी रहेगा और उसके बावजूद भी सरकार अगर नहीं जागती है तो फिर जवाबदेही कानून यात्रा फिर से शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि जवाबदेही कानून लागू होने के बाद लापरवाह और बेलगाम अफसरों पर लगाम लगेगी और जनता की समस्याओं का तुरंत समाधान होगा और जो कर्मचारी अधिकारी काम चोरी करेंगे या लोगों के काम नहीं करेंगे उनके खिलाफ सख्त एक्शन भी होगा।

कमेटी ने सौंपी सरकार को रिपोर्ट
इधर गहलोत सरकार ने सितंबर 2019 में जवाबदेही कानून का मसौदा तैयार करने के लिए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राम लुभाया की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट फरवरी 2020 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंप दी थी लेकिन आज तक इस रिपोर्ट पर कोई काम आगे नहीं बढ़ पाया है।


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