
सर्वे में पीछे, एक भी घर पर नहीं लगाया क्यूआर कोड
जयपुर. नगरीय विकास कर की वसूली करने वाली निजी कम्पनी स्पैरो सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड अब ग्रेटर निगम पर भारी पड़ने लगी है। यही वजह है कि कम्पनी से निगम अब पीछा छुड़ाना चाहता है। निगम प्रशासन ने नोटिस जारी कर अनुबंध समाप्त करने की बात कही है।
दरअसल, कम्पनी ने जब काम संभाला था, उस समय नगरीय विकास कर वसूली के बड़े सपने दिखाए थे। कम्पनी अनुमान के मुताबिक वसूली नहीं कर पा रही है और उसके कर्मचारियों की दुर्व्यवहार की शिकायतों से भी निगम प्रशासन परेशान हो चुका है। सर्वे के नाम पर फर्म के लोग कभी भी आ धमकते हैं।
ऐसे कर रही कम्पनी मनमानी
-विज्ञापन शुल्क के जारी बिल का एक भी सर्वे फॉर्म जोन उपायुक्त से प्रमाणित नहीं करवाया जा रहा है।
-विज्ञापन बोर्ड (नीलामी साइट्स को छोड़कर) से 30 से 35 करोड़ राजस्व आने की संभावना है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह शुल्क 6.70 करोड़ राशि की डिमांड बनाई गई।
-अनुबंध के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-21 में 3.60 सर्वे करना थे, लेकिन अब तक फर्म 1.35 सम्पत्तियों का ही सर्वे कर पाई है।
-सर्वे के बाद आरएफआइडी टैग या क्यूआर कोड लगाए जाने थे, लेकिन एक भी सम्पत्ति पर ये कोड नहीं लगाया गया।
हर स्तर पर कम्पनी फेल
कम्पनी अनुबंध के मुताबिक काम नहीं कर रही है। सम्पत्तियों के सर्वे की गति बेहद धीमी है। अब तक क्यूआर कोड लगाना शुरू नहीं किए हैं। राजस्व की वसूली भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। इन सभी बिन्दुओं को देखते हुए अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
-महेंद्र सोनी, आयुक्त, ग्रेटर नगर निगम
कम्पनी का दावा
-अनुबंध के बाद अब तक ग्रेटर नगर निगम में 96 करोड़ और हैरिटेज नगर निगम में 53 करोड़ रुपए नगरीय विकास कर के वसूल कर चुके।
-होर्डिंग साइट को छोड़कर विज्ञापन साइट से ग्रेटर निगम में 10.60 करोड़ और हैरिटैज निगम में 6.5 करोड़ रुपए वसूल किए हैं।
Published on:
12 Aug 2022 04:03 pm
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