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Food oil: खाने के तेल की कीमतों में जोरदार तेजी

दुनियाभर में तेल और तिलहनों ( food oil ) की मांग के मुकाबले आपूर्ति कमजोर ( oilseeds drops ) होने से घरेलू बाजार में खाने के तेल ( edible oil ) की कीमतों में जोरदार तेजी आई है। पिछले साल की तुलना में इस साल खाद्य तेलों कीमतों में अब तक 70 से 80 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। खाद्य तेल व्यापारियों ( oil traders ) के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ज्यादा होने की वजह से आयातक ऊंचे भाव पर खाद्य तेलों का आयात करने से बच रहे हैं।

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Food oil: खाने के तेल की कीमतों में जोरदार तेजी

Food oil: खाने के तेल की कीमतों में जोरदार तेजी

जयपुर। दुनियाभर में तेल और तिलहनों की मांग के मुकाबले आपूर्ति कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाने के तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है। पिछले साल की तुलना में इस साल खाद्य तेलों कीमतों में अब तक 70 से 80 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। खाद्य तेल व्यापारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ज्यादा होने की वजह से आयातक ऊंचे भाव पर खाद्य तेलों का आयात करने से बच रहे हैं। फरवरी में खाद्य तेलों का आयात 27 फीसदी घटकर 8 लाख टन रह गया, जबकि चालू तेल वर्ष की नवंबर से फरवरी के दौरान आयात में 4 फीसदी गिरावट दर्ज की गई।
देश के वायदा बाजार एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन के भाव में करीब छह फीसदी की उछाल के साथ 6974 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे है। इस साल अब तक एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन के दाम में 48 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है। देश के हाजिर बाजार में भी सोयाबीन का भाव रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर है। इससे भी खाद्य तेलों के भावों में तेजी का रूख बना हुआ है। भारत में पाम तेल का बड़े पैमाने पर आयात होता है। ज्यादातर ढाबों, रेस्तराओं और पैकेटबंद फूड, स्नैक्स में पाम तेल का इस्तेमाल होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आरबीडी पामोलीन का भाव 590 डॉलर से बढ़कर 1100 डॉलर, क्रूड पाम तेल का भाव 580 डॉलर से बढ़कर 1120 डॉलर प्रति टन हो चुका है। देश में खाद्य तेलों की ब्लेडिंग में भी पाम आयल का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि देश में खाद्य तेल के दाम बढ़ रहे हैं।
तेल-तिलहन बाजार के जानकार बताते हैं कि देश में सोयाबीन का स्टॉक काफी कम है, जबकि मांग बनी हुई है इसलिए कीमतों में तेजी बनी हुई है। सोयाबीन में करीब 18 फीसदी तेल होता है, जबकि 38 फीसदी प्रोटीन। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण पशुचारा में इसका इस्तेमाल बहुतायत में होता है। सोयाबीन से तेल और मील तैयार किया जाता है। सोयामील का उपायोग पशुचारे में होता है। इसके अलावा, सोयाबीन से दूध, आटा, टोफू समेत कई खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जानकार बताते हैं कि कोरोना काल में प्रोटीनयुक्त खाद्य उत्पादों में सोयाबीन की खपत बढऩे के कारण इसकी मांग के मुकाबले सप्लाई का टोटा पड़ गया है।