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सुसाइडः दर्द का दंश झेल नहीं पाया… दे गया उम्रभर का दर्द

जयपुर. सवाई मानसिंह अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में गुरुवार सुबह बीमारी से परेशान युवक ने छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली।
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जयपुर

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Lalit Tiwari

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Updated: 9 Jan 2026, 12:36 PM IST

जयपुर. सवाई मानसिंह अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में गुरुवार सुबह बीमारी से परेशान युवक ने छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। युवक किडनी ट्रांसप्लांट के बाद नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती था। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और इलाज के लिए आए मरीज व परिजन दहशत में आ गए। पुलिस के अनुसार आत्महत्या करने वाले की पहचान हंसराज जाट के रूप में हुई है, जो टोंक जिले के ठोरिया पचेवर गांव का निवासी था। करीब साढ़े तीन महीने पहले उसकी किडनी ट्रांसप्लांट हुई थी। उसके पिता गोगाराम जाट ने किडनी दान की थी। तबीयत बिगड़ने पर डेढ़ महीने पहले उसे फिर से एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार सुबह अचानक हंसराज वार्ड से बाहर निकला और छठी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। उसके गिरते ही फर्श पर खून ही खून फैल गया और शरीर खुल गया। पोर्च में डॉक्टरों के चैंबर और बिलिंग काउंटर बने हुए हैं। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। मरीज और परिजन घबरा गए। अस्पताल में मौजूद लोगों का कहना है कि कुछ देर के लिए किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है।बेटा बचाने को किडनी दी, वो ही चला गया...

हंसराज के पिता गोगाराम जाट ने रोते हुए बताया कि बेटे को बचाने के लिए किडनी दी थी और वो ही चला गया। सुबह उन्होंने बेटे के साथ चाय पी थी और दूध भी दिया था। वे उस समय वार्ड में मौजूद थे। करीब साढ़े नौ बजे हंसराज अचानक बाहर गया और कुछ ही पलों में यह दुखद घटना हो गई। गोगाराम ने कहा कि ट्रांसप्लांट और इलाज में काफी खर्च हुआ था, जो उन्होंने उधार लेकर किया। हंसराज 22 गोदाम क्षेत्र स्थित एक मॉल में नौकरी करता था। उसके सात साल की बेटी खुशबू और तीन साल का बेटा जितेश है। पिता ने कहा कि बेटे की मौत के बाद अब बच्चों के भविष्य की चिंता सबसे ज्यादा सता रही है।डॉक्टर भी हैरान...क्यों उठाया ऐसा कदम

इस घटना ने इलाज से जुड़े डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग के अधीक्षक नचिकेत व्यास ने बताया कि हंसराज का किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा था। शुरुआती दिक्कतें सामान्य थीं, इसी कारण उसे निगरानी में रखा गया था। इलाज के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि वह मानसिक तनाव में है। डॉ. धनंजय अग्रवाल ने बताया कि मरीज की किडनी सही तरीके से काम कर रही थी। एम्स सहित अहमदाबाद और दिल्ली से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी केस पर चर्चा की गई थी और सभी की राय में मरीज की हालत ठीक थी।