
जयपुर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि सड़कों की क्षमता सीमित है। प्रमुख चौराहों, बाजारों और आवासीय इलाकों में पीक आवर के दौरान लंबा जाम आम बात हो गई है। फ्लाइओवर, अंडरपास और सिग्नल फ्री मार्ग बनने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। ऐसे में सवाल है कि क्या अब तक उठाए गए कदम पर्याप्त हैं या व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है।
-शहर में ट्रैफिक जाम का स्थायी समाधान अभी दूर नजर आता है। ट्रैफिक ट्रैफिक साइन का अभाव और अवैध पार्किंग बड़ी वजह है। सख्त लेन सिस्टम, जेब्रा क्रॉसिंग की पालन और बाजार क्षेत्रों में रिक्शा व अनियंत्रित वाहनों पर नियंत्रण जरूरी है। नागरिकों को भी यातायात अनुशासन अपनाना होगा।
— कविता टेलर, सी स्कीम
-सिर्फ फ्लाइओवर बनाना पर्याप्त नहीं है। मजबूत सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो विस्तार और बसों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। यदि लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाएं तो जाम स्वतः कम होगा। साथ ही अवैध पार्किंग पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
— दीपेंद्र वर्मा, बापू नगर
-एमआई रोड, बापू बाजार और पुराने शहर में पार्किंग नीति लागू किए बिना राहत संभव नहीं है। मल्टी लेवल पार्किंग का उपयोग अनिवार्य किया जाए और भारी वाहनों को रिंग रोड से डायवर्ट किया जाए। स्मार्ट सिग्नल और कैमरा आधारित मॉनिटरिंग से भी यातायात नियंत्रण बेहतर हो सकता है।
— दीपू पाटीदार, समाजसेवी
-शहर में बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों की एंट्री समयबद्ध होनी चाहिए। कमर्शियल वाहनों के लिए अलग मार्ग तय किए जाएं। हर मंडल में ट्रैफिक कंट्रोल हेल्पलाइन और चौराहों पर प्रभावी निगरानी जरूरी है। जनसंख्या के हिसाब से यातायात योजना को अपडेट करना होगा।
— मुकेश सोनी, झोटवाड़ा
-ट्रैफिक की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मेट्रो फेज दो को तेजी से पूरा करना और उत्तरी रिंग रोड का निर्माण जरूरी है। अतिक्रमण हटाकर सड़कों की वास्तविक चौड़ाई बहाल की जाए। एआइ आधारित स्मार्ट सिग्नल सिस्टम लागू हो, जो ट्रैफिक दबाव के अनुसार समय तय करे।
— विकास शर्मा, एडवोकेट
-ट्रैफिक जाम का एक कारण सड़क किनारे बढ़ता व्यावसायिक दबाव भी है। बाजार क्षेत्रों में सीमित समय के लिए ही माल उतारने की अनुमति हो और ई रिक्शा व ठेला वाहनों के लिए अलग जोन तय किए जाएं। साथ ही लोगों को अनावश्यक निजी वाहन उपयोग से बचने के लिए जागरूक किया जाए। केवल निर्माण कार्य नहीं, व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है।
— मोहम्मद इजहार, घाटगेट
-सड़क निर्माण के साथ ट्रैफिक ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। कई जगह सिग्नल, कट और यू टर्न की योजना वैज्ञानिक नहीं है, जिससे जाम बढ़ता है। हर बड़े प्रोजेक्ट के बाद यातायात का स्वतंत्र मूल्यांकन हो और उसके अनुसार सुधार किए जाएं। तकनीक के साथ व्यवहारिक योजना भी जरूरी है।
— अक्षय, मानसरोवर......
अगले सप्ताह का सवाल
क्या जयपुर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था आमजन की जरूरतों के मुताबिक है? सुधार के लिए क्या कदम उठाने की जरुरत है।
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Updated on:
28 Feb 2026 02:56 pm
Published on:
28 Feb 2026 02:56 pm
