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सुन्दर सागर महाराज बोले, धर्म को जीवन का संस्कार बनाएंआस्था से सजा सिद्धचक्र महामंडल विधान, श्रद्धालुओं ने चढ़ाए 512 अर्घ्य

जयपुर

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Newsdesk

Jul 28, 2026

Rajasthan

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
श्चड्डह्लह्म्द्बद्मड्ड.ष्शद्व
निवाई. श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मंदिर सोमवार को श्रद्धा औऋ भक्ति का विशेष केंद्र बना रहा। आचार्य सुन्दर सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान मंदिर परिसर मंत्रोच्चार, जयघोष से गूंज उठा। विधान मंडप पर 512 अर्ध्य समर्पित किए गए। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ एवं भगवान पार्श्वनाथ का सामूहिक कलशाभिषेक कर वृहद शांतिधारा की गई। मीडिया प्रभारी सुनील भाणजा एवं मंदिर अध्यक्ष सुशील जैन पाइप फैक्ट्री वालों ने बताया कि सुबह अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। विधान से पूर्व सुरेशचंद, अरुण कुमार एवं अर्पित कुमार लटूरिया ने तीर्थ सम्मेद शिखरजी में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान संपन्न कराने के लिए आचार्य श्री को श्रीफल भेंट किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सौधर्म इन्द्र दिलीप जैन एवं चेतना जैन रतलाम ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस दौरान विष्णु बोहरा, अमित कटारिया, लालचंद कठमाणा, राजेंद्र बगड़ी, दिनेश चंवरिया, रामपाल चंवरिया, नवरत्न जैन, हुकुमचंद, दिलीप भाणजा, महावीर प्रसाद जैन, चेतन गंगवाल, विमल सोगानी, विनोद मोटूका सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री को धर्मसभा के लिए श्रीफल भेंट किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने कहा कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे जीवन के प्रत्येक व्यवहार में उतारना ही सच्ची साधना है। सिद्धचक्र महामंडल विधान मनुष्य को धैर्य, क्षमा, संयम, समर्पण और अटूट आस्था का संदेश देता है। उन्होंने मैना रानी का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से की गई आराधना जीवन के बड़े से बड़े संकट को भी दूर करने की शक्ति रखती है। हितेश छाबड़ा ने बताया कि आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य समापन 29 जुलाई को विश्वशांति महायज्ञ, गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं मंगल कलश स्थापना के साथ होगा।