
६३ वर्ष के सुरेंद्र बिहार के रहने वाले है , इनको फलेरिया नाम की बीमारी है ,यह बीमारी २५ साल से है ,यह जयपुर में साल में २-३ बार आते है ,इनको बांसुरी बजानी बहुत अच्छी आती है , ये बांसुरी बजा कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते है ,पर्यटक इनकी बांसुरी सुन कर १० -२० रुपए दे देते है , ये जयपुर में जन्माष्टमी पर जरूर आते है , इस बीमारी से पहले ये बिहार में रिक्शा चलाते थे

६३ वर्ष के सुरेंद्र बिहार के रहने वाले है , इनको फलेरिया नाम की बीमारी है ,यह बीमारी २५ साल से है ,यह जयपुर में साल में २-३ बार आते है ,इनको बांसुरी बजानी बहुत अच्छी आती है , ये बांसुरी बजा कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते है ,पर्यटक इनकी बांसुरी सुन कर १० -२० रुपए दे देते है , ये जयपुर में जन्माष्टमी पर जरूर आते है , इस बीमारी से पहले ये बिहार में रिक्शा चलाते थे

६३ वर्ष के सुरेंद्र बिहार के रहने वाले है , इनको फलेरिया नाम की बीमारी है ,यह बीमारी २५ साल से है ,यह जयपुर में साल में २-३ बार आते है ,इनको बांसुरी बजानी बहुत अच्छी आती है , ये बांसुरी बजा कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते है ,पर्यटक इनकी बांसुरी सुन कर १० -२० रुपए दे देते है , ये जयपुर में जन्माष्टमी पर जरूर आते है , इस बीमारी से पहले ये बिहार में रिक्शा चलाते थे