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मीन मलमास शुरू होने के साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

गज पर सवार होकर आई मीन की संक्रांन्ति

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jaipur

अश्विनी भदौरिया / जयपुर। मीन राशि में सूर्य देव का प्रवेश 14 मार्च को रात्रि 11:41 बजे हो गया। इसके साथ ही मलमास की शुरूआत हुई और एक बार फिर से मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया। मीन की संक्रान्ति इस बार गज पर सवार होकर आईं हैं। इसका उपवाहन खर (गधा) है। मीन संक्रान्ति का मुख्य वाहन गज होने से यह महीना आमजन के लिए खुशहाली भरा रहेगा। ज्योतिष मर्मज्ञ पं. केदारनाथ दाधीच ने बताया कि जिस संक्रान्ति का वाहन अहिंसक पशु होता है वह प्रजा के लिए शुभफलदायी रहती है। इस बार मीन की संक्रान्ति का वाहन गज और उपवाहन खर है जो कि हिंसक पशु नहीं है। इसलिए यह संक्रान्ति जनमानस के लिए शुभफलदायी है।

मांगलिक कार्यों पर लगा विराम
मीन मलमास की शुरूआत के साथ ही एक बार फिर से मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया है। मलमास की समाप्ति 14 अप्रेल को सूर्य के मेष राशि पर आने से होगा। इसके बाद मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। मेष की संक्रान्ति का मुख्य वाहन महिष और उपवाहन ऊंट रहेगा। मेष की संक्रान्ति के साथ शुरू होने वाले मांगलिक कार्य आगे 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी तक चलेंगे। हिंसक पशुओं की सवारी पर संक्रान्तियों का प्रवेश अशुभ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिंसक पशुओं की सवारी पर आने वाली संक्रान्तियों का फल अशुभ होता है। विशेषकर आततायी, उपद्रवियों और विद्रोहियों के लिए यह घातक रहती है। संवत 2075 में अधिकांश संक्रान्तियों का वाहन हिंसक पशु ही है। केवल वृषभ और सिंह की संक्रान्तियों के वाहन ही अहिंसक पशु हैं।

ऐसे आता है मल मास
ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो सूर्य हर 30 दिन में राशि परिवर्तन करता है। इस प्रकार जब १२ महीनों में १२ राशियों में विचरण करता है तो राशियों में विचरण करते हुए सूर्य धनु और मीन राशि में आ जाता है। अत: मासों को मल मास कहा जाता है।