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गोकुलधाम से भी अच्छी जयपुर की यह सोसायटी, यहां रहते केवल बुजुर्ग, दिनभर खेलते और लगाते ठहाके

जयपुर में बुजुर्गों के लिए खास आवासीय योजना, नौकरी से सेवानिवृत्त फिर भी दिनभर व्यस्त, सूर्योदय से पहले उठते हैं, घूमते हैं, खेलते हैं और लगाते हैं ठहाके

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गोकुलधाम से भी अच्छी जयपुर की यह सोसायटी, यहां रहते केवल बुजुर्ग, दिनभर खेलते और लगाते ठहाके

जया गुप्ता / जयपुर। 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की गोकुलधाम सोसायटी को कौन नहीं जानता। सभी ऐसी सोसायटी अपने लिए चाहते हैं। वहीं जयपुर में भी एक ऐसी ही सोसायटी है, जहां लोग गोकुलधाम की तरह मिल-जुलकर रहते हैं, एक-दूसरे के सुख-दु:ख में भागीदार होते हैं और एक साथ सभी त्यौहार मनाते हैं।

जयपुर की इस सोसायटी की सबसे खास बात यह है कि यह सोसायटी केवल बुजुर्गों के लिए ही है। यहां रहने वाले बुजुर्ग ऐसे नौकरी से भले ही रिटायर्ड हो चुके हैं, लेकिन आज भी पहले की तरह ही खुद को व्यस्त रख रहे हैं। यही वजह है कि उम्रदराज होने के बाद भी फिट हैं। कालवाड़ रोड पर बनी आवासीय योजना में रह रहे बुजुर्ग खुद को व्यस्त रखकर खुशीपूर्वक जीवन बिता रहे हैं।

शहर से दूर रह रहे इन बुजुर्गों की दिनचर्या ही ऐसी है कि हर कोई तरोताजा नजर आता है। एक साथ उठना, पार्क में घूमना, कसरत करना और हर त्योहार को एकसाथ मनाना, यह उनकी दैनिक गतिविधि का हिस्सा बन चुका है।

यहीं कारण है कि सभी एक परिवार के सदस्य बन चुके हैं। आपस में बॉन्डिंग में भी इतनी जबर्दस्त है कि सभी एक परिवार से दूर रहकर भी दूसरे परिवार के नजदीक हैं। सभी बुजर्गों के बच्चे जयपुर के बाहर या विदेश में काम कर रहे हैं। मगर इस परिवार के बीच उस परिवार की याद उन्हें कम सताती है।

कभी महसूस नहीं होता अकेलापन
यहां रह रहे सेवानिवृत्त एसबीआई अधिकारी हरिनारायण भंसाली ने कहा कि सभी के साथ रहकर अकेलापन महसूस नहीं होता है। सभी त्योहार अच्छे से मनाते हैं। सभी साथ रोजाना कैरम खेलते हैं। बहुत सुकूनभरा जीवन बीत रहा है।

बच्चे हमारे पास रहने के लिए आते हैं

इंजीनियर्स इंडिया लि. के रिटायर्ड अफसर रवि कौल ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद जिंदगी ज्यादा व्यस्त है। दिनभर खुद को किसी ना किसी काम में बिजी रखते हैं। यहां भी कई तरह की एक्टिविटीज होती हैं, जिनमें हिस्सा लेते हैं। अब तो हालत ये है कि हम बच्चों के पास कम जाते हैं, बल्कि बच्चे हमसे मिलने यहां आते हैं।

परिवार की कमी महसूस नहीं होती
मंजू मोहपाल ने कहा कि सबके बीच रहकर परिवार की कमी महसूस नहीं होती है। सुबह वॉकिंग, दिनभर गपशप में ही समय बीत जाता है। हर त्योहार को एक जगह मिलकर मनाते हैं। जन्माष्टमी भी सभी ने मिलकर मनाई।