फसलों पर मोयला, चेपा या एफिड कीट का खतरा मंडराने लगा है। इससे किसान तो चिंतित हैं ही, राहगीर भी परेशान हैं। मौसम में बदलाव के चलते चेपा मच्छर का प्रकोप अधिक है।
तापमान में आए बदलाव के साथ लोगों को गर्मी का एहसास हो रहा है। दिन में धूप काटने लगी है वहीं सुबह शाम ठंड का असर जरूर है। इस बीच, तापमान बढ़ने के साथ ही मोयला, चेपा या एफिड का भी प्रकोप बढ़ गया है। दुपहिया वाहन सवारों व राहगीरों को भी चलने में परेशानी आ रही है। पूरे दिन लोग आंखों से मच्छर निकालते नजर आते हैं। माैसम विभाग के अनुसार मौसम साफ हाेने और तापमान बढ़ने से धीरे-धीरे मार्च तक चेपा मच्छर का प्रकाेप बढ़ता जाएगा।
यह सूक्ष्म जीव सरसों की फसल के फूल बनने या पकने के कगार पर पहुंचने के साथ ही पनपने लगता है। इसका बायोलॉजिकल नेम एफिड है। तापमान बढ़ने पर इसके पंख पनपने लगते हैं। इसका जीवन चक्र करीब 7—10 दिन का होता है लेकिन संख्या में यह बड़ी तेजी से बढ़ते हैं। खासकर सरसों फसल को नुकसान पहुंचाता है। सरसों की फसल कटने के साथ ही यह राहगीरों पर इसका प्रकोप परवान पर होता है। ये कीट गेहू एवं सरसों का रस चूस लेते है, जिससे फसल कमजोर हो जाती है। ये कीट अमूमन झुंड में तथा खेत के किनारों पर अधिक रहते है। फसल कटने पर हर तरफ फैल जाते हैं। आंख में गिरने पर जलन से लेकर इंफेक्शन तक हो सकता है।
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