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कश्मीर में अब कयामत

कश्मीर में नए आतंकियों की भर्ती में इजाफा हुआ है, जिसके कारण आतंकियों के पास हथियारों की कमी पड़ रही है। सेना को जानकारी मिली है कि वे हथियारों के लिए सेना और पुलिस पर हमले की तैयारी कर रहे हैं। हाल में घाटी में अलग-अलग स्थानों पर पुलिस वालों की हत्या के दौरान भी उनके हथियार लूट लिए गए थे। इस साल आतंकियों की भर्ती पहले की तुलना में बढ़ गई है। इस साल 31 जुलाई तक ही 131 कश्मीरी आतंक का दामन थाम चुके हैं। पिछले साल 117 आतंकी भर्ती हुए थे। राज्य में सर्वाधिक हिंसा हुई थी। 2016 में 88 नौजवानों ने आतंक की राह थामी
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कश्मीर में नए आतंकियों की भर्ती में इजाफा हुआ है, जिसके कारण आतंकियों के पास हथियारों की कमी पड़ रही है। सेना को जानकारी मिली है कि वे हथियारों के लिए सेना और पुलिस पर हमले की तैयारी कर रहे हैं। हाल में घाटी में अलग-अलग स्थानों पर पुलिस वालों की हत्या के दौरान भी उनके हथियार लूट लिए गए थे। इस साल आतंकियों की भर्ती पहले की तुलना में बढ़ गई है। इस साल 31 जुलाई तक ही 131 कश्मीरी आतंक का दामन थाम चुके हैं। पिछले साल 117 आतंकी भर्ती हुए थे। राज्य में सर्वाधिक हिंसा हुई थी। 2016 में 88 नौजवानों ने आतंक की राह थामी थी। इस साल खत्म होने तक आंकड़ा डेढ़ सौ से भी पार होने की आशंका है। पिछले दो-तीन सालों की तुलना में यह संख्या सबसे अधिक है। ज्यादा भर्ती होने के कारण आतंकियों को ज्यादा हथियारों की जरूरत पड़ रही है। सीमा और नियंत्रण रेखा पर सख्ती के कारण वे सीमापार से हथियार नहीं ला पा रहे हैं। वे जवानों पर हमला कर हथियार लूट रहे हैं। दूसरे, खबर यह भी है कि वे सेना एवं पुलिस के ऐसे स्थानों पर हमला कर सकते हैं जहां हथियार रखे हुए हैं। सेना एवं अन्य सुरक्षा बलों को खास सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
सेना का मानना है कि हाल के वर्षों में कश्मीर में कट्टरता में भारी बढ़ोतरी हुई है। तकनीक एवं संचार सेवाओं के इस्तेमाल से इसका प्रचार-प्रसार बहुत ज्यादा हुआ है। बुरहान वाणी की मौत के बाद से ही लगातार इसमें बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसकी जद में नौजवान आ रहे हैं और वे हथियार उठा रहे हैं।सूत्रों ने कहा कि 2014 के आसपास भी जवानों पर हमले बढ़े थे। 2010 में भी ऐसे मामले आए थे। सेना की अंदरुनी जांच कहती है कि पुलिस जवानों पर हमले मुख्य वजह हथियारों की लूटपाट होती है। इन सालों के दौरान भी स्थानीय स्तर पर आतंकी भर्ती बढ़ी थी। आतंकी उन जवानों को हिस्सा बना रहे हैं, जो कभी सेना या पुलिस के लिए खुफिया सूचनाएं एकत्र करते थे। इन्हें पहले एसओजी यानी स्पेशनल ऑपरेशन ग्रुप का हिस्सा बनाया जाता है तथा फिर पुलिस में सिपाही भर्ती किया जाता है।दक्षिण कश्मीर के शोपियां, पुलवामा, अनंतनाग, कुलगाम और अवंतीपुरा में सबसे अधिक युवा आतंकी संगठन में शामिल हुए। इनमें से भी अकेले शोपियां से इस साल 35 युवा आतंकी बन चुके हैं। कश्मीर घाटी में अलगाववादियों की भारत विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। लेकिन कश्मीर से आई खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की नई चिंता घाटी में अलकायदा से जुड़े संगठनों की मजबूत होती पैठ है। अब तक कई युवक इन संगठनों में भर्ती हो चुके हैं।
अंसार घजवत उल हिंद नामक आतंकी संगठन में अबतक कई युवक भर्ती हो चुके हैं। जाकिर रशिद भट उर्फ जाकिर मूसा है इस संगठन का प्रमुख है जो पांच साल से सक्रिय है। मूसा अलकायदा का साथ होने का दावा करता है और कश्मीर में लाना चाहता इस्लामी शासन लाना चाहता है। कश्मीर मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा कहने पर मूसा ने अलगाववादियों को धमकी दी कहा कि अब कश्मीर इस्लामिक राज्य बनाने की लड़ाई है। हुर्रियत नहीं माना तो करेगा सर कलम कर दिया जाएगा। इसके साथ अलगाववादियों के पाकपरस्त नारों की जगह शरियत का नारा बुलंद किया ।
माना जाता है कि मूसा अलकायदा आतंकी अनवर अल अवलाकी से अधिक प्रभावित हुआ है।अवलाकी की मौत 2011 में अफगानिस्तान में अमेरिकी हवाई हमले में हो गई थी।अलकायदा में आतंकियों की भर्ती को अवलाकी के दिमाग की उपज माना जाता है।मूसा पढ़ा लिखा है और इसका इस्तेमाल युवाओं को बरगलाने में करता है। 24 साल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़कर आतंकी बना। अंतरराज्यीय कैरम चैम्पियनशिप प्रतियोगिता में भी राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुका है।

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