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सुई धागे की कला पहुंची हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, रूमा ने सिखाई कशीदाकारी

बाड़मेर: अमरीका में आयोजित कार्यशाला में रूमादेवी से छात्राओं ने सीखी कशीदाकारी

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The art of needle thread reached Harvard University, Ruma taught embroidery

Barmer: Girls learn embroidery from Rumadevi in ​​workshop organized in USA

राजस्थानी रंग में रंगी यूनिवर्सिटी
बाड़मेर. राजस्थान और बाड़मेर की कला के लिए यह दिन कुछ खास था। अमरीका में हार्वर्ड यूनिवसिर्टी के पब्लिक एंड हैल्थ डिपार्टमेंट में रूमादेवी की क्राफ्ट वर्कशॉप के चलते अलग ही रौनक थी। परिसर में बाड़मेर की कशीदाकारी और चटक रंगों के कपड़े की खुशबू माहौल को महका रही थी।
अमरीका में हार्वर्ड यूनिवसिर्टी में १३ फरवरी को भारतीय समयानुसार देर रात १ बजे वर्कशॉप की शुरूआत हुई। जैसे ही रूमादेवी आई तो उन्होंने परम्परागत रूप से राजस्थानी में सभी को राम-राम सा कहा...वहां मौजूद विद्यार्थियों और विभागाध्यक्षों ने उनका शानदार स्वागत किया। पूरा माहौल मानों राजस्थानी रंग में रम गया।

आत्मीयता के कायल हो गए विद्यार्थी
रूमादेवी की आत्मीयता से बातचीत का तरीका और वर्कशॉप में छोटी से छोटी बात को भी सरल तरीके से बताने का अंदाज मानो सभी को भा गया। बिना किसी झिझक के छात्राओं ने कशीदाकारी की बारीकियां पूछी। छात्राओं के समूह उनके पास आते रहे और वे उनको फेब्रिक और कला की विशेषताएं समझा रही थी। इसके बाद उन्होंने छात्राओं से पूछा कि क्यों न आप सभी का टेस्ट हो जाए, वर्कशॉप में जो आपने सीखा है उसे फेब्रिक पर भी उतार दें। छात्राएं तो जैसे इसी का इंतजार कर रही थी।


सुई-धागों के साथ दिखाई कला
रूमादेवी की क्लास में छात्राओं ने फेब्रिक पर सुई-धागे के साथ कशीदाकारी करके भी दिखाई। कुछ बातें जो समझ में नहीं आई उन्होंने पूछी भी। कशीदाकारी में विवि की बड़ी संख्या में छात्राओं ने रूचि दिखाई।


वाणी गायन और घूमर की गूंज
कला के साथ यहां पर राजस्थान का वाणी गायन भी खूब गूंजा। परम्परागत गायन की कला से भी छात्राएं रूबरू हुई। वहीं बाद में घूमर की गूंज तो पूरे विवि परिसर में सुनाई दी। छात्राएं भी घूमर पर खुद को नहीं रोक पाई।