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JLF 2025: लोक गीत में समाया समाज का ताना-बाना: मालिनी

Jaipur Literature Festival 2025: चर्चा का केंद्र बिन्दु लोक कला और मालिनी अवस्थी के अनुभव और उनके जीवन की यात्रा रहा।

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जयपुर

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Alfiya Khan

Feb 03, 2025

जयपुर। लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने जेएलएफ में शब्दों की दुनिया के बीच लोकसंगीत का ताना-बाना बुनकर साहित्यप्रेमियों के दिलों को छू लिया। सेशन: फर्स्ट एडिशन: ‘चंदन किवाड़’ के दौरान अभिनेत्री इला अरुण और लेखक यतींद्र मिश्र ने वाणी प्रकाशन समूह की अदिति माहेश्वरी गोयल के साथ पुस्तक पर विस्तार से चर्चा की।

चर्चा का केंद्र बिन्दु लोक कला और मालिनी अवस्थी के अनुभव और उनके जीवन की यात्रा रहा। इस दौरान मालिनी अवस्थी ने जहां अपनी बुक के बारे में दिलचस्प बातों को बयां किया। वहीं, भोजपुरी, अवधी, बुंदेलखंडी आदि भाषा में लोकगीत गाकर श्रोताओं पर अपना जादू चलाया।

अवस्थी ने कहा कि मेरी गुरु गिरिजा देवी ने ही मुझे इस लायक बनाया कि आज मुझे लोकसंगीत के लिए याद किया जा रहा है। लोकसंगीत सही मायने में कोमलता, व्यंग्य और पीड़ा को दर्शाता है। इसलिए मुझे लगता है कि यह समाज की सबसे बड़ी ताकत है और यह समाज के बीच समाया हुआ है।

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